Akhilesh Tripathi
पत्रकारिता में करियर की शुरुआत साल 2013 मेंआर्यन टीवी (पटना) से हुई, फिर ईनाडु डिजीटल (ईटीवी हैदराबाद) में लगभग ...Read More
Written by Akhilesh Tripathi
Last Updated on - December 28, 2025 10:33 AM IST

भारतीय टीम को हाल ही में साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 0-2 से हार का सामना करना पड़ा. गौतम गंभीर के मार्गदर्शन में शीर्ष टीमों के खिलाफ दस टेस्ट में मिली हार के बाद अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं. गौतम गंभीर के टेस्ट के हेड कोच से छुट्टी को लेकर भी बात की जा रही है, हालांकि इस फैसले को लेने में बीसीसीआई कोई जल्दीबाजी में नहीं है.
बीसीसीआई के गलियारों में इसे लेकर अभी भी दुविधा है कि विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप 2025- 27 सत्र के बाकी नौ टेस्ट के लिये क्या गंभीर को ही कोच बनाये रखना उचित होगा. भारत को श्रीलंका के खिलाफ अगस्त 2026 में दो टेस्ट खेलने हैं जबकि अक्टूबर में टीम को न्यूजीलैंड दौरा करना है, इसके बाद आस्ट्रेलियाई टीम जनवरी फरवरी 2027 में पांच टेस्ट की सीरीज खेलने आएगी.
बीसीसीआई के एक सूत्र के मुताबिक, बीसीसीआई हुक्मरानों का गंभीर को पूरा समर्थन हासिल है. भारतीय टीम अगर टी20 विश्व कप बरकरार रखती है या फाइनल में भी पहुंचती है तो वह पद पर बने रहेंगे, यह देखना रोचक होगा कि क्या वह टेस्ट प्रारूप में भी कोच बने रहते हैं.
गौतम गंभीर का बीसीसीआई के साथ करार 2027 वनडे विश्व कप तक है लेकिन ऐसी संभावना है कि इस पर पुनर्विचार किया जाए. यह पांच सप्ताह बाद शुरू हो रहे टी20 विश्व कप में भारत के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा
सूत्र के मुताबिक साउथ अफ्रीका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज हारने के बाद क्रिकेट बोर्ड में शीर्ष पदस्थ किसी शख्स ने अनौपचारिक तौर पर वीवीएस लक्ष्मण से पूछा था कि क्या वह टेस्ट टीम के कोच बनने के इच्छुक हैं. लक्ष्मण हालांकि बेंगलुरू में उत्कृष्टता केंद्र में क्रिकेट प्रमुख बने रहने में ही खुश हैं. गंभीर के साथ इस बात का फायदा है कि टेस्ट क्रिकेट में कोचिंग के लिये अधिक विकल्प नहीं हैं, वीवीएस लक्ष्मण कोच बनने के इच्छुक नहीं हैं.
टी20 विश्व कप टीम से शुभमन गिल को बाहर किये जाने के फैसले पर गंभीर की छाप थी और कई खिलाड़ियों का मानना है कि अगर भारतीय क्रिकेट के अगले ‘पोस्टर ब्वॉय’ का यह हाल हो सकता है तो बाहर होने वालों में अगला नाम किसी का भी हो सकता है. भारतीय ड्रेसिंग रूम में भी गंभीर के दौर में कई खिलाड़ी उस तरह से सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं, जैसे राहुल द्रविड़ के कार्यकाल में करते थे जब सभी की भूमिकायें तय थी. द्रविड़ के तीन साल के कार्यकाल में खिलाड़ियों को अपनी उपयोगिता साबित करने के लिये भी लंबा समय मिला था.
टी20 विश्व कप के बाद दो महीने इंडियन प्रीमियर लीग के होंगे और बीसीसीआई के पास अलग अलग प्रारूप के लिये अलग कोच या तीनों प्रारूपों के लिये एक ही कोच पर विचार करने के लिये काफी समय होगा.
इनपुट- भाषा
This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful.
Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings.
If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again.
