Bharat Malhotra
Bharat Malhotra अभी cricketcountry.com/hi की टीम की अगुआई कर रहे हैं. भारत के पास डिजिटल मीडिया का 16 साल का अनुभव है. करियर की विधिवत श ...Read More
Written by Bharat Malhotra
Last Updated on - November 30, 2025 5:14 PM IST

आज दुनियाभर में लीग क्रिकेट के चर्चे हैं. लीग क्रिकेट बहुत बड़ा हो चुका है. और इसका सिरा सब आईपीएल से जोड़ते हैं. लेकिन आईपीएल के शुरू होने से एक साल पहले एक और लीग शुरू हुई थी. वह लीग अपनी तरह की पहली लीग थी. भारत में किसी ने इसके बारे में तब शायद सोचा भी नहीं था. लेकिन इंडियन क्रिकेट लीग भारत में लीग क्रिकेट की पितामह कही जा सकती है. और इसके पीछे सोच थी एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉक्टर सुभाष चंद्रा की. आज डॉक्टर सुभाष चंद्रा का 75वां जन्मदिन है. और इस मौके पर हम बात करेंगे कि कैसे उन्होंने दुनिया से पहले टी20 लीग क्रिकेट के भविष्य को देख लिया था.
बात है भारत वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप के पहले ही दौर में बाहर हो चुका था. और ऐसे वक्त में जब देश में गम का माहौल था डॉक्टर चंद्रा ने क्रिकेट के चाहने वालों को एक नया फ्लेवर और तेवर से रू-ब-रू करवाने की सोची. इंडियन क्रिकेट लीग में शहरों ने आधार पर टीम को बांटा गया था. वैसे ही जैसा बाद मे आईपीएल में हुआ. इसमें अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों को जोड़ा गया. रंगीन कपड़े, दूधिया रोशनी और सफेद गेंद से टी20 क्रिकेट लीग का आगाज हुआ. कपिल देव और ब्रायन लारा जैसे बड़े नाम इससे जुड़े.
टी20 क्रिकेट को लेकर तब तक बीसीसीआई भी बहुत ज्यादा रोमांचित नहीं था. वह टी20 क्रिकेट की कामयाबी को लेकर असमंजस में था. लेकिन यहीं डॉक्टर चंद्रा की दूरंदेशी ने देख लिया था कि यह क्रिकेट का भविष्य है. न सिर्फ टी20 बल्कि लीग क्रिकेट ही दुनिया को बदल देगा. तब किसी को इतनी उम्मीद नहीं थी कि यह नया फॉर्मेट क्रिकेट के लिए कितना बड़ा हो सकता है.
साल 2016 में डॉक्टर चंद्रा ने भी इसका जिक्र किया था. उन्होंने कहा था, ‘हां, आईपीएल, आईसीएल की वजह से कामयाब हुआ. और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने इससे बहुत पैसा कमाया है.’
आईसीएल टीम में चार विदेशी, आठ जूनियर और दो इंटरनेशनल खिलाड़ी हो सकते थे. इन टीमों को इस तरह तैयार किया गया था कि जूनियर भारतीय खिलाड़ियों को भारत और दुनिया के दूसरे देशों की टीमों के साथ खेलने का मौका मिले. और वे उनके अनुभव से सीख सकें.
आईपीएल की शुरुआत 2008 में हुई. और तब से लेकर अब तक यह काफी बड़ा बन चुका है. अब बोर्ड को प्रसारण अधिकार से ही हजारों करोड़ रुपये हासिल होते हैं. लेकिन 2007 में जब आईसीएल शुरू हुआ तब तक किसी ने इसका विचार भी नहीं किया था. आईसीएल ने लीग क्रिकेट के लिए जो राह दिखाई उसने क्रिकेट को वहां तक पहुंचने में मदद की, जहां वह आज नजर आता है.
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