'हम नहीं चाहते कि खिलाड़ियों को विश्व कप में असफलता का डर हो'
विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका का पहला मुकाबला इंग्लैंड के साथ टूर्नामेंट के पहले मैच में 30 मई को होगा।
Published On May 19, 2019, 02:46 PM IST
Last UpdatedMay 19, 2019, 02:46 PM IST
फाफ डु प्लेसिस © Getty Images
फाफ डु प्लेसिस की कप्तानी में दक्षिण अफ्रीका टीम अपना विश्व कप अभियान शुरू करने जा रही है। आज तक एक भी विश्व कप खिताब ना जीतने वाले प्रोटियाज टीम के लिए चीजें आसान नहीं होंगी लेकिन कप्तान डु प्लेसिस चाहते हैं कि खिलाड़ी असफलता के डर के बिना इस आईसीसी टूर्नामेंट में उतरें।
डु प्लेसिस ने कहा, “हमें लगता था कि विश्व कप जीतने के लिए कुछ खास करना होता है, कि आपको अपने साधारण प्रदर्शन से अलग कुछ करना होता है, जो कि सच नहीं है। हम जो भी लगातार कर रहे हैं, जिस तरीके से दूसरी टीमों को मात दे रहे है. वही करना है। हमें अपने बेसिक्स अच्छे तरीके से करने होंगे, किसी एक के 50 गेंद पर शतक बनाने या 20 रन देकर 7 विकेट लेने से कोई टीम विश्व कप नहीं जीतती है।”
दक्षिण अफ्रीकी कप्तान ने आगे कहा, “मैं उस जगह पर रह चुका हूं और मैं उस दबाव को जानता हूं। मुझे पता है कि इससे कैसे निपटना है। यही कारण है कि हम चाहते है लड़के खुलकर खेले क्योंकि हम नहीं चाहते कि वो असफलता का डर महसूस करें जो कि उनमें से कुछ के लिए विश्व कप का मतलब है। अगले कुछ महीनों में इंग्लैड में हमारी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हम अपने खेल को कितनी अच्छी तरह से लागू कर पाते हैं, हमें अपनी टीम को सर्वश्रेष्ठ बनाने की जरूरत है। हर खिलाड़ी को अपनी ताकत ढूंढनी होगी।”
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उन्होंने कहा, “खिलाड़ी अपने साथी खिलाड़ियों से बेहतर संबंध रखते हैं और जहां मानसिक स्थिति के महत्व की बात आती है, वहां मैं और कोच एक ही स्तर पर हैं। मैं सकारात्मक परिदृश्य में काफी विश्वास रखता हूं, कैसे शांत रहें और मेरे खेल में इसका अलग महत्व है। इसलिए मैं खिलाड़ियों के साथ भी मैं यही कहता हूं, एक पल में मौजूद रहना कितना जरूरी है; उदाहरण के लिए जब कोई कैच छूटता है, आप उसे लेकर कुछ नहीं कर सकते और बात इसकी होती है कि आप अपनी मानसिकता किस तरह बदलते हैं।”