फखर जमां © AFP (File Photo)
फखर जमां © AFP (File Photo)

पाकिस्तान की बैटिंग सनसनी फखर जमां ने आखिरकार बताया कि जसप्रीत बुमराह की नो गेंद पर कैच आउट होने के बाद उन्होंने कैसा महसूस किया था। उन्होंने बताया यह एहसास कुछ ऐसा था जैसे उन्हें फिर से नई जिंदगी मिली हो। युवा बाएं हाथ के बल्लेबाज जमां को इस मैच के पहले बहुत कम लोग जानते थे। लेकिन जिस तरह की पारी उन्होंने फाइनल मैच में खेली, हर कोई उनके गुणगान गाने लगा। जमां पाकिस्तान टीम की अंतिम एकादश में खराब फॉर्म से गुजर रहे ओपनर शहजाद की जगह शामिल किए गए थे। जैसे ही वह आए उन्होंने ये बात पक्की कर दी कि पाकिस्तान को ओपनिंग जोड़ी को पुख्ता करने के लिए और कहीं न देखना पड़े।

भारत के खिलाफ फाइनल के पहले फखर पहले से ही दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, और इंग्लैंड के खिलाफ खेली अपनी पारियों से प्रभावित कर चुके थे। ऐसे में भारत के खिलाफ उनसे खूब उम्मीदें थी। लेकिन उनके इरादे उस समय चकनाचूर होते नजर आए जब उन्होंने जसप्रीत बुमराह की गेंद पर एमएस धोनी को कैच पकड़ा दिया। जैसा कि कहते हैं भाग्य वीरों का ही साथ देता है। जमां को रोकते हुए अंपायर ने कहा कि वह चेक करना चाहते हैं कि कहीं बुमराह ने नो- बॉल तो नहीं फेंक दी। जब इसे जांचा गया तो वह यह एक अवैध गेंद थी क्योंकि गेंदबाजी करते वक्त बुमराह का पैर बॉलिंग क्रीज के बाहर था। इस तरह से जमां को जीवनदान मिल गया और शतक लगाकर ही उन्होंने दम लिया।  [ये भी पढ़ें: टीम इंडिया ने दूसरे वनडे में वेस्टइंडीज को 105 रनों से हराया]

ट्रिब्यून के हवाले से जमां ने कहा, “भारत के खिलाफ फाइनल के लिए मेरे दिमाग में अपनी योजनाएं थी। मैं अपने दिमाग में ये चीज लेकर गया था कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगा और पाकिस्तान की मैच जीतने में मदद करूंगा। क्योंकि पाकिस्तान-भारत मैच एक ऐसा मैच है जहां अगर आप अच्छा प्रदर्शन करते हो तो हीरो बन जाते हो।”

उन्होंने आगे कहा कि फॉर्म में रहते हुए उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी लेनी पड़ी। उन्होंने कहा, “मैं भारत के खिलाफ अपना पहला मैच खेल रहा था इसलिए मुझे दूसरों से ज्यादा करने की जरूरत थी। उस मैच के पहले मैंने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया था। इसका मतलब था कि टीम मेरे पर निर्भर थी। जब मैं विकटों के पीछे कैच आउट हो गया तो मेरा दिल डूब गया। मैं हैरान था और धीरे- धीरे अपनी सारी उम्मीदों और सपनों को चकनाचूर होते देखते हुए ड्रेसिंग रूम की ओर अपने कदम बढ़ाने लगा। मैं लगातार सोच रहा था कि मैं अपना विकेट यहां कैसे गंवा सकता हूं। मुझे बड़ा स्कोर करना था, 3 रन पर आउट नहीं होना था।”

27 साल के जमां ने आगे बताया, “जब अंपायरों ने मुझे रोका, वह एक नई उम्मीद थी। यह किसी नई जिंदगी का मिलना था। मैंने खुद से कहा कि अगर ये नो बॉल है तो जाहिरतौर पर यह मेरा दिन है।”