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ये आईपीएल का समय नहीं है लेकिन पूरे देश में क्रिकेट का बुखार छाया हुआ है। दिल्ली एनसीआर के कुछ किसानों ने गेहूं और सरसों के खेतों को क्रिकेट मैदानों में तब्दील कर दिया है। यह एक ऐसे हाई क्वालिटी मैदान की तरह हैं जो कुछ दूरी से यूके के  काउंटी मैदान नजर आते हैं। इसमें हर दिन तीन मैच और अगर फ्लडलाइट में खेले जाएं तो पांच मैच आयोजित किए जा सकते हैं। एक मैच को प्रति टीम 3,500 रुपए से 7,500 रुपए लगते हैं। अगर आप फ्लडलाइट में मैच खेलना चाहते हैं तो आपको दोगुना पैसा भुगतान करना पड़ सकता है।

इस पैसे में गेंद की कीमत और अंपायर की फीस शामिल है। टर्फ स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के प्रोपराइटर सचिन खुराना के मुताबिक बालियावास और करदारपुर के पास करीब 40 क्रिकेट ग्राउंड्स हैं। 20 साल के कॉलेज स्टूडेंट राकेश हर्षाना कॉर्पोरेट मैचों में वीकेंड्स के दौरान अंपायरिंग करते हैं, टीओआई के हवाले से उन्होंने बताया, “अंपायर के तौर पर जॉब हासिल करने के लिए हमें 7 से 8 महीने तक ट्रेनिंग करनी पड़ती है। हम यूट्यूब देखते हैं, पुराने मैचों की हाइलाइट देखते हुए अंपायरिंग के बारे में अपनी समझ बढ़ाते हैं।”

बैंगलोर की पूमा कंपनी के मार्केटिंग विभाग में काम करने वाले बिनवंत सहगल ने कहा, ” पिछले कुछ सालों में एनसीआर में अच्छे मैदान बने हैं। मुझे उम्मीद है कि ऐसे ही मैदान अन्य शहरों में भी बनेंगे।”

पेशे से वकील आयुष सोहनी ने बताया कि गुड़गांव में स्लॉट पाना आसान है। सोहनी यहां वीकेंड में टी20 क्रिकेट खेलने आते हैं। उन्होंने कहा, “पहले हम दिल्ली में खेला करते थे लेकिन पिछले कुछ सालों में लोग गुड़गांव खेलने के लिए आने लगे हैं क्योंकि यहां बहुत सारे मैदान हैं। यहां मनचाहे स्लॉट मिलना आसान है।”