जानें कैसे सचिन तेंदुलकर के 'लेटर' ने दिलवाई थी हरमनप्रीत को 'नौकरी'

हरमनप्रीत कौर ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ महिला वर्ल्ड कप 2017 सेमीफाइनल में 171 रनों की पारी खेली।

Edited By : Devbrat Bajpai |Jul 22, 2017, 09:43 AM IST

Published On Jul 22, 2017, 09:43 AM IST

Last UpdatedJul 22, 2017, 09:43 AM IST

सचिन तेंदुलकर और हरमनप्रीत कौर Image courtesy: Getty
सचिन तेंदुलकर और हरमनप्रीत कौर Image courtesy: Getty

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ महिला विश्व कप सेमीफाइनल में ताबड़तोड़ 115 गेंदों में 171 रनों की पारी खेलने के बाद हरमनप्रीत कौर भारत के घर-घर में छा गई हैं। भले ही देश और दुनिया ने अभी हरमन को पहचाना हो लेकिन क्रिकेट एक्सपर्ट्स ने उनकी प्रतिभा ने कुछ दिन पहले ही भांप लिया था। हरमन की प्रतिभा को सबसे पहले भारतीय महिला टीम की पूर्व कप्तान डियाना इडुलिज ने पहचाना था। यही नहीं उन्होंने सचिन तेंदुलकर की कुछ मदद से हरमन की पश्चिमी रेलवे में नौकरी भी लगवाई थी।

इडुलिड- वेस्टर्न रेलवे से एक रिटायर्ड स्पोर्ट्स ऑफिसर हैं- उन्होंने सबसे पहले हरमनप्रीत की प्रतिभा को जूनियर सर्किट में पहचाना था और वह चाहती थीं कि हरमन मुंबई की क्रिकेट टीम में शामिल हों। कौर उस समय 24 साल की थीं और उनके पास पहले से ही उत्तरी रेलवे से जॉब का ऑफर था ऐसे में कोई बेहतर पोस्ट ही उन्हें मुंबई शिफ्ट करवा सकती थी। इडुलिज ने याद करते हुए बताया, “मैंने उसे कहा था, ‘मैं तुम्हें बड़ी पोस्ट दिलवाउंगी’, उसे उत्तरी रेलवे में जूनियर क्लास मिल रही थी। मैंने उसे चीफ ऑफिस सुपरिटेंडेंट पोस्ट ऑफर की। उनका आवेदन पत्र दिल्ली भेजा गया, लेकिन प्रेसीडेंट ने उसे नकार दिया।”  [ये भी पढ़ें: आईसीसी महिला विश्व कप के फाइनल में पहुंची टीम इंडिया]

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तभी सचिन तेंदुलकर आगे आए। इडुलिज ने कहा, “मैंने सचिन से कहा, जो संसद के सदस्य हैं, कि वे रेलवे मंत्री को लेटर लिखें, ताकि हरमनप्रीत कौर का केस आगे बढ़े।” सचिन तेंदुलकर के लेटर और थोड़ी मान मनौव्वल के बाद इडुलिज ने उच्च अधिकारियों को मना लिया और इस तरह से कौर की वेस्टर्न रेलवे में नौकरी लग गई। पुरुष खिलाड़ियों के उलट महिला खिलाड़ियों को कोई भी चीज आसानी से नहीं मिलती। वर्ल्ड कप के लिए इंग्लैंड जाने से पहले कई खिलाड़ी किट बैग के लिए संघर्ष कर रही थीं। बहरहाल, इडुलिज मानती हैं कि यहां उम्मीद की किरण है। जो शुरुआत कर रहे हैं, यह पहला मौका था जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने बिजनेस क्लास में सफर किया। अब दैनिक भत्ते में भी बराबरी है, उन्हें भी हर दिन के 100 डॉलर (6400 रुपए) मिलते हैं।

इडुलिज बताती हैं, “पिछली बार जब मैं इंग्लैंड मैनेजर के तौर पर गई थी हमें £25 (2094 रुपए) दिए गए थे। लड़कियां पास की सुपर मार्केट से पैक्ड फूड लाती थीं, उसको उबालती थीं और खाती थीं। कम से कम अब चीजें बदलने लगी हैं।”

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