इंग्लैंड के पूर्व कप्तान हैं नसीर हुसैन।  © Getty Images
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान हैं नसीर हुसैन। © Getty Images

भारत बनाम इंग्लैंड विशाखापत्तनम में खेला गया सीरीज का दूसरा टेस्ट भारतीय टीम ने 246 रनों से जीत लिया है। भारत के टेस्ट कप्तान विराट कोहली के करियर का 50वां टेस्ट मैच था जो उनके और टीम दोनों के लिए ही यादगार रहा। कोहली ने विशाखापत्तनम टेस्ट की पहली पारी में शानदार 167 रन बनाए तो वहीं दूसरी पारी में भी उन्होंने 81 रनों योगदान दिया। भारत ने इस मैच में चौथे दिन ही  लगभग जीत हासिल कर ली थी, पांचवें दिन इंग्लैंड की टीम केवल मैच बचाने के लिए खेल रही थी। कई पूर्व खिलाड़ी कोहली की इस जीत के लिए उनकी तारीफ कर रहे हैं वहीं एक शख्स ऐसा भी है जिसे लगता है कि कोहली अब भी एक परिपक्व कप्तान नहीं बन पाए हैं। ये भी पढ़ें: हमने भारत को संघर्ष करने पर मजबूर किया: एलिस्टेयर कुक

वह शख्स और कोई नहीं बल्कि इंग्लैंड के ही पूर्व कप्तान नासिर हुसैन हैं। नासिर ने विशाखापत्तनम मैच के बाद मीडिया के सामने यह कहा कि भारतीय टेस्ट कप्तान चतुराई और रणनीति बनाने में अब भी अपरिपक्व हैं। भारत ने विशाखापत्तनम टेस्ट को जीतकर सीरीज में 1-0 से बढ़त बना ली है और इसका सबसे बड़ा कारण कोहली ही हैं। मैच में उन्होंने पहले बल्ले से योगदान दिया इसके बाद कप्तान के बतौर अपने कौशल की मदद से टीम को जीत की तरफ ले गए लेकिन नासिर का मानना कुछ और ही है। उन्होंने कहा, “मैं सोचता हूं कि कोहली के लिए वह काफी खराब दिन था। मुझे नहीं लगता कि एक कप्तान के रूप में आप शुरूआत से ही हर एक तरीके को अपनाते हो। एक कप्तान टीम के लिए उदाहरण बन सकता हो, जैसा कोहली ने अपने बल्ले से कर दिखाया। आप खेल के प्रति अपना जूनून दिखा सकते हो जो कोहली हमेशा करते हैं लेकिन चतुराई के मामले में वह अभी काफी अपरिपक्व हैं।” उन्होंने वाइजैग टेस्ट में कोहली के फील्ड सेटअप और गेंदबाजी के चयन पर भी सवाल उठाए। हुसैन ने कहा, “कुछ फील्ड जो उसने लगाई थीं, जिस तरफ से वह गेंदबाजों को ला रहा था, हर गेंद के बाद फील्ड में बदलाव, शॉर्ट लेग नहीं लगााना जब इंग्लैंड के बल्लेबाज बस ड्रॉ के लिए खेल को रोक रहे थे और वह लाइन जिस पर उसने हमीद और कुक को गेंदबाजी कराई, मुझे लगता है यह सब उसकी अपरिपक्वता को दर्शाता है।” हुसैन ने यह भी कहा, “मुझे लगता है कि मैच जीतने का दबाव भारत पर था और आप कोहली को देखकर यह जान सकते हैं कि वह कितने दबाव में है। कप्तान के बतौर उसके रिकॉर्ड प्रशंसनीय हैं चाहे वह बल्ले से हो या मैच जीतने को लेकर। लेकिन ज्यादातर जीत तब ही मिली हैं उसे जब भारत ने टॉस जीता हो, टॉस जीतो और गेंदबाजी स्पिनर्स को थमा दो। भारत चौथे दिन ही मैच जीत सकता था लेकिन अब कोहली को उससे बेहतर कप्तानी करनी होगी जैसी उसने पांचवे दिन की थी।” ये भी पढ़ें:  भारत बनाम इंग्लैंड विशाखापत्तनम टेस्ट में जेम्स एंडरसन ने तोड़ा 110 साल पुराना रिकॉर्ड

नासिर हुसैन ने यह बात तब कही जब इंग्लैंड की टीम मैच में 246 जैसे बड़े अंतर से हार गई लेकिन अगर हम पहले मैच की बात करें जो राजकोट में खेला गया था तो वहां पर भारत की स्थिति इंग्लैंड जैसी ही थी। भारत पांचवें दिन केवल मैच बचाने के लिए खेल रहा था और एलियेस्टर कुक के हर प्रयास के बाद भी कोहली वह मैच बचाने में कामयाब रहे जबकि राजकोट की पिच वाइजैग के मुकाबले बल्लेबाजी के लिए उतनी अच्छी नहीं थी। वहीं इस मैच में कोहली ने चौथे दिन शुरूआत से ही फील्ड को आक्रामक ही रखा था और लगातार विकेट लेने की कोशिश की थी और इसमें भारत ने सफलता भी पाई थी। कुक और हमीद दोनों ही चौथे दिन के अंत तक आउट हो गए थे और पांचवें दिन इंग्लैंड का कोई भी बल्लेबाज वह नहीं कर पाया जो कोहली ने राजकोट में कर दिखाया था।