Former South Africa cricket captain Faf Du Plessis will ‘take the knee’
फोटो साभार : Instagram/Faf du plessis

पूर्व दक्षिण अफ्रीकी कप्तान फाफ डु प्लेसिस ने शुक्रवार को ब्लैक लाइव्स मैटर अभियान के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया है। पूर्व कप्तान ने ये भी माना कि कि उनका ये कहना कि ‘हमें रंग नहीं दिखता’ गलत था।

इस मुद्दे ने दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट में नस्लीय विभाजन दिखाया है। 30 अश्वेत पूर्व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने दावा किया था कि एकल नियंत्रण निकाय के गठन के 29 साल बाद भी नस्लवाद खेल में बड़ा मुद्दा बना रहा था।

डु प्लेसिस ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए कहा कि बीएलएम के लिए उनका समर्थन ऐसे समय में आया जब दक्षिण अफ्रीका में कई अन्याय हुए। उन्होंने कहा, “अगर हम केवल उन लोगों के लिए प्रतीक्षा करते हैं जो हम पर व्यक्तिगत रूप से हमला करते हैं, तो हम हमेशा ‘मेरे रास्ते बनाम आपके रास्ते’ की नीति पर जीते रहेंगे और ये हमें कहीं नहीं ले जाएगा।”

पूर्व कप्तान ने कहा, “मैं सुनने की इच्छा से खामोश रहा लेकिन प्रतिक्रया नहीं दी। मेरे नजरिए को रोकना लेकिन किसी और का दर्द सुनने के लिए जल्दी करना। मुझे पता था कि शब्दों की कमी होगी और मेरी समझ वहां नहीं है जहां इसकी जरूरत है।”

उन्होंने कहा, “मैं अपने विचारों का आत्मसमर्पण करता हूं और रक्षक की तरह घुटने टेकता हूं। मैं स्वीकार करता हूं कि दक्षिण अफ्रीका अभी भी नस्लवाद से बेहद विभाजित है और ये मेरी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है कि मैं अपनी सहानुभूति दिखाऊं, कहानियों को सुनूं, सीखूं और फिर अपने विचारों, शब्दों और कार्यों के साथ इसके समाधान का हिस्सा बनूं।”

‘जोफ्रा आर्चर की गलती से हो सकता था करोड़ों का नुकसान’

जनवरी में इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच के लिए अश्वेत क्रिकेटर टेम्बा बावुमा की जगह श्वेत रासी वैन डार डूसन के चयन को लेकर दिए बयान के लिए डु प्लेसिस की आलोचना की गई थी। अब उसने स्वीकार किया उनका वो बयान काफी बचकाना था।

पूर्व कप्तान ने कहा, “मैंने पहले भी इसे लेकर गलती की है। जब मैंने एक मंच पर ये कहा कि मैं रंग नहीं देखता तो मेरे अच्छे इरादे जानकारी की कमी की वजह से असफल रहे थे। अपनी अनभिज्ञता में मैंने अपने विचार रखकर दूसरों के संघर्ष को ठुकरा दिया। इसलिए मैं ये कह रहा हूं कि सभी लोगों का महत्व तब तक नहीं है जब तक अश्वेत लोगों का महत्व ना हो। मैं अब बोल रहा हूं क्योंकि अगर मैं अगर आदर्श स्थिति का इंतजार करूंगा तो कभी नहीं बोल पाउंगा। मैं सहानुभूति कि विरासत छोड़ना चाहता हूं।”