घुटने की परेशानी भी नहीं तोड़ सका मनोबल, इच्छाशक्ति को ताकत बना भारत का ये लाल बना देश का सबसे तेज धावक
घुटने की परेशानी से जूझ रहे विशाल टीके ने कैसे तमाम परेशानियों को पीछे छोड़कर देश के सबसे तेज 400 मीटर के धावक बन गए.
Published On May 26, 2026, 01:47 PM IST
Last UpdatedMay 26, 2026, 01:47 PM IST
भारत में कई ऐसे एथलीट रहे हैं जो लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं. ऐसी ही एक कहानी सबके सामने आई है जिसने हर किसी को चौंकाकर रख दिया है. ये कहानी है तमिलनाडु के जौलारपेट की एक ऐसे बच्चे की जो आज से 13 साल पहले घुटने की परेशानी से जूझ रहा था उसका चलना भी मुश्किल था लेकिन उसने इससे हार नहीं मानी और अपनी इच्छाशक्ति को ताकत बनाकर वह भारत का 400 मीटर में सबसे तेज धावक बन गया. हम बात कर रहे हैं विशाल टीके की.
जी हां, 13 साल पहले इस एथलीट के घुटने की परेशानी के इलाज के लिए उनके पिता थेन्नारासु रोज उन्हें स्टेडियम लेकर जाते थे. स्टेडियम में उनके पैर को घुटने तक दबाकर खड़ा किया जाता था. जिससे उनका दर्द और परेशानी ठीक हो जाए और उनके पैर मजबूत हो जाए. ऐसे बच्चे को देख किसी को भी यह यकीन नहीं होगा कि वह आगे जाकर इतना सफल धावक बनेगा. हालांकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.
स्टेडियम में विशाल रेत में खड़े होकर दूसरे बच्चों को दौड़ता देखते थे और यहां से उनके अंदर गजब की इच्छाशक्ति आई और कुछ ही दिनों में वह दौड़ने लग गए. आज वह भारत का सबसे तेज 400 मीटर धावक बन गया है. रांची में हुई प्रतियोगिता में विशाल ने 44.98 सेकंड में 400 मीटर दौड़ पूरी कर इतिहास रच दिया. वह 45 सेकंड से कम समय में दौड़ पूरी करने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए.
कामयाबी देख पिता की भर आई आंखें
जैसे ही विशाल फिनिश लाइन पार करके बाहर आए, उनके पिता भावुक होकर ट्रैक पर दौड़ पड़े और बेटे को गले लगा लिया. पिता ने कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनका बेटा इतना बड़ा मुकाम हासिल करेगा. विशाल का सफर आसान नहीं रहा. छोटी उम्र में ही उन्हें घर छोड़कर तमिलनाडु के स्पोर्ट्स हॉस्टल में रहना पड़ा. शुरुआत में वह 100 और 200 मीटर की दौड़ में हिस्सा लेते थे. लेकिन उनके कोच श्रीनिवासन ने उनकी लंबी कद-काठी और शानदार स्ट्राइड देखकर कहा कि वह 400 मीटर में ज्यादा बेहतर कर सकते हैं.
ईमानदारी और मेहनत लाई रंग
पहले विशाल इस बदलाव के लिए तैयार नहीं थे, क्योंकि कई सालों की मेहनत के बाद इवेंट बदलना आसान नहीं होता. लेकिन उन्होंने अपने कोच पर भरोसा किया और पूरी मेहनत से 400 मीटर की तैयारी शुरू कर दी. साल 2024 में उनका बेस्ट टाइम 46.77 सेकंड था. फिर उन्हें ऑस्ट्रेलियाई कोच जेसन डॉसन के साथ ट्रेनिंग का मौका मिला. विशाल ने पूरी ईमानदारी से मेहनत की और लगातार खुद को बेहतर बनाते गए.
कुछ ही महीनों में उन्होंने अपना समय 45.57 सेकंड तक पहुंचा दिया. इसके बाद रांची में 44.98 सेकंड का रिकॉर्ड बनाकर पूरे देश को गर्व महसूस कराया. विशाल की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं है, बल्कि यह मेहनत, संघर्ष और भरोसे की मिसाल है. एक पिता जो बेटे को सही से चलाना चाहता था, आज उसी बेटे को देश के लिए उड़ते हुए देख रहा है.