Gautam Gambhir call it quits on International career
Gautam Gambhir © Getty Images

भारतीय क्रिकेट के सबसे चहेते क्रिकेटरों में से एक गौतम गंभीर ने आज क्रिकेट को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। गंभीर ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट्स से संन्या लेने का फैसला किया। 2007 और 2011 विश्व कप के नायक रहे गंभीर ने भारतीय क्रिकेट को बहुत कुछ दिया। नंबर वन टेस्ट टीम का हिस्सा रहे गंभीर को 2009 में नंबर वन टेस्ट बल्लेबाज का खिताब भी मिला।

गंभीर की कप्तानी में कोलकाता नाइट राइडर्स ने एक नहीं बल्कि दो बार ट्रॉफी पर कब्जा किया। गंभीर ने ना केवल मैदान पर बल्कि मैदान के बाहर भी भारत की सेवा की। मैदान पर उनके शॉट्स की तरह ही उनके विचार भी मजबूत और सटीक हैं। भारतीय क्रिकेट का हर प्रशंसक की तरफ से हम गंभीर को उनके शानदार करियर के लिए दिल से शुक्रिया करते हैं।

गंभीर ने फेसबुक पर पोस्ट किए भावुक वीडियों में कहा, “आप सभी का शुक्रिया मुझे समय देने के लिए, मैं यहा आज आपको कुछ ऐसा बताने जा रहा हूं जो मैं काफी दिनों से सोच रहा हूं। ये विचार मेरे साथ दिन रात रहा है, मेरे साथ हर  फ्लाइट में बैग की तरह रहा है, ये मेरे साथ हर अभ्यास सेशन में रहा है और मुझ पर किसी चालाक गेंदबाज की तरह हंसा है, कई दिन इस विचार ने मेरे खाने को बेस्वाद बना दिया है, ग्राउंड, ड्रेसिंग रूम, वॉशरूम हर जगह इस विचार ने मेरा पीछा किया है। जितनी बार मैं भारत, कोलकाता नाइट राइडर्स या दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए खेलने उतरा हूं, ये विचार शोर में बदल गया और मेरे पीछे ड्रेसिंग रूम तक आया और चिल्लाया और मुझसे बोला गौती, अब तुम्हारा वक्त आ गया।

जब 2014 आईपीएल में मैने तीन बार लगातार शून्य पर आउट हुआ तो इस विचार ने मुझे जोर का तमाशा मारा। और फिर जब इंग्लैंड का दौरा खराब रहा, 2016 में फिर अपने घुटनों पर था। इंग्लैंड के खिलाफ राजकोट टेस्ट के बाद मुझे ड्रॉप कर दिया गया। जब मैं अपने आत्मविश्वास को फिर से पाना चाहता था, तब वो शोर मुझे फिर सुनाई दिया, उसने फिर कहा गौती तुम्हारा वक्त खत्म हो गया लेकिन मैने उसे नजरअंदाज किया।

मै इसे हराना चाहता था, गिरने के बजाय मैने अपने शरीर को और ज्यादा सजा दी। घर के पीछे लॉन में सुबह की दौड़ और लंबी हो गई। मेरे ट्रेनर को मुझ पर और ज्यादा सख्त होने की हिदायत मिली। मैं खाना ऐसे खाता था जैसे मैं दिवालिया हो गया था।

इस मुश्किल समय में आपके प्यार ने स्टेरॉयड्स की तरह काम किया। मैं फिर से जीतना चाहता था। 2017 के अच्छे घरेलू सीजन के बाद मैने आत्मविश्वास के साथ इस साल के आईपीएल में हिस्सा लिया। मेरे पैरों में नई बैटरी लग गई थी और मेरा खेल समंदर की तरह गरज रहा था। मुझे लगा वो शोर खत्म हो गया लेकिन मैं गलत था।

दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए 6 मैचों के बाद वो वापस आ गया और पहले से कहीं ज्यादा तेज। शायद मेरा समय आ गया था, हां मेरा समय आ गया था। इसलिए मैं यहां 15 साल तक अपने देश के लिए क्रिकेट खेलने के बाद मैं इस खूबसूरत खेल से संन्यास ले रहा हूं।

सभी दर्द, तकलीफों और डर के बावजूद में अगले जन्म में भी यही सब चाहूंगा। शायद भारत के लिए कुछ और जीत, कुछ और शतक और शायद कुछ पांच विकेट हॉल भी। लेकिन ये कुछ ज्यादा ही महात्वाकांक्षी लग रहा होगा लेकिन मैने कई बार सपनों को सच होते देखा है।

दो विश्व कप, दोनों फाइनल मैचों में सर्वाधिक रन स्कोरर होना सपने जैसा ही था। लेकिन शायद ऊपर बैठा कोई मेरी कहानी लिख रहा था और अब उनके पेन में स्याही खत्म हो गई है।”