Gautam Gambhir: I have no role in Virender Sehwag’s resignation from DDCA cricket committee
Gautam Gambhir (File Photo) © Getty Images

बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) से इस्तीफा के मामले में अब टीम में उनके पूर्व साथी रहे गौतम गंभीर का बयान आया है। गंभीर ने साफ किया कि मनोज प्रभाकर का गेंदबाजी कोच पर नियुक्ति नहीं हो पाना इसका कारण नहीं है। वीरू के अलावा समिति से आकाश चोपड़ा और राहुल संघवी ने गेंदबाजी कोच के रूप में मनोज प्रभाकर को बरकरार रखने की सिफारिश की थी लेकिन इसे स्वीकृति नहीं मिली। अभी यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि क्या यह सहवाग के इस्तीफा देने का कारण था।

पीटीआई के सूत्रों के अनुसार तीनों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है क्योंकि राज्य संस्था को अगले दो दिन में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार नया संविधान सौंपना है जिसके बाद नई समितियों का गठन होगा। वीरेंद्र सहवाग से इस बाबत पूछा गया तो उन्‍होंने कहा, ‘‘हम सब एक साथ आए और अपना समय और प्रयास दिया जिससे कि क्रिकेट समिति के रूप में अपनी भूमिका के दायरे में दिल्ली क्रिकेट के सुधार में मदद और योगदान दे सकें। दिल्ली क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ हित में हम आपको बताना चाहते हैं कि हम तीनों अपने दैनिक जीवन के व्यस्त कार्यक्रम के कारण डीडीसीए की क्रिकेट समिति के काम को आगे जारी नहीं रख पाएंगे।’’

बताया जा रहा है कि कप्तान गौतम गंभीर प्रभाकर की नियुक्ति के खिलाफ थे क्योंकि उनका नाम साल 2000 के मैच फिक्सिंग में सामने आया था। गंभीर ने हालांकि साफ किया कि भले ही भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण वह प्रभाकर के खिलाफ थे लेकिन सहवाग के त्यागपत्र के लिए उन्हें दोष देना गलत है।

गंभीर ने ट्वीट किया, ‘‘कहा जा रहा है कि मनोज प्रभाकर की दिल्ली गेंदबाजी कोच पर नियुक्ति के मेरे विरोध के कारण डीडीसीए क्रिकेट समिति ने इस्तीफा दिया। हां, जब क्रिकेटरों के कथित भ्रष्टाचार की बात आती है तो मैं हमेशा शून्य सहिष्णुता की नीति पर चलता रहा हूं लेकिन जैसा मुझे बताया गया कि उनके त्यागपत्र का कारण यह था कि 20 सितंबर को जब लोढ़ा समिति की सिफारिशों को अपनाया जाएगा तो क्रिकेट समिति भंग कर दी जाएगी। मैंने सोचा की स्थिति स्पष्ट कर दूं।’’

डीडीसीए अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘‘गौतम हमेशा इस सिद्धांत पर चला है कि वह दिल्ली के ड्रेसिंग रूम में ऐसे व्यक्ति को नहीं चाहता जो मैच फिक्सिंग या किसी अन्य तरह से गलत काम से किसी भी तरह जुड़ा रहा हो। यह कहना गलत होगा कि सहवाग और गंभीर के बीच इस मुद्दे को लेकर मतभेद थे क्योंकि कप्तान पैनल के विशेष आमंत्रित सदस्य थे।’’

अधिकारी ने कहा, ‘‘नए संविधान को स्वीकार किए जाने के बाद सहवाग हितों के टकराव नियम के दायरे में आ जाते क्योंकि वह डीडीसीए अध्यक्ष के चैनल में विशेषज्ञ हैं। इसी तरह सिंघवी मुंबई इंडियन्स से जुड़े हैं। इसलिए उन्हें पता था कि उन्हें जाना पड़ेगा।’’ जब यह पूछा गया कि 2007-08 सीजन में जब प्रभाकर गेंदबाजी कोच थे और दिल्ली ने रणजी ट्राफी खिताब जीता और फिर पिछले साल उन्होंने विरोध क्यों नहीं किया तो गंभीर के करीबी माने जाने वाले इस अधिकारी ने कहा, ‘‘दोनों ही मामलों में किसी ने गंभीर की नहीं सुनी। अगर आप 2016 सीजन को देखें तो अजय जडेजा को कोच नियुक्त किया गया और कप्तान के रूप में उसे पीछे हटना पड़ा। वह किसी ऐसे ड्रेसिंग रूम का हिस्सा नहीं रहा जिसमें कथित मैच फिक्सर शामिल रहा हो।’’

(एजेंसी इनपुट के साथ)