डीडीसीए की प्रबंध समिति में शामिल होने के लिए गंभीर को लेना होगा संन्यास!

लोढा समिति के नियम के मुताबिक बतौर क्रिकेटर अगर गंभीर दिल्ली क्रिकेट संघ का हिस्सा बनेंगे तो ये हितों के टकराव का मुद्दा होगा।

Edited By : Cricket Country Staff |Nov 11, 2017, 07:04 PM IST

Published On Nov 11, 2017, 07:04 PM IST

Last UpdatedNov 11, 2017, 07:04 PM IST

गौतम गंभीर दिल्ली के लिए रणजी क्रिकेट खेलते हैं © Getty Images (File Photo)

गौतम गंभीर को दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ की प्रबंध समिति में सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल करना हितों के टकराव का मुद्दा बन गया है। गंभीर दिल्ली के लिये प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलते है और अगर वह क्रिकेट से संन्यास लेने से पहले इस समिति का हिस्सा बनते हैं तो यह मामला लोढ़ा समिति की सिफारिशों के मुताबिक हितों के टकराव के तहत आएगा। वैसे गंभीर इस पद को लेकर काफी उत्साहित हैं, कल उन्होंने ट्विटर पर इस बात का ऐलान किया था और इसके लिए उन्होंने खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का शुक्रिया भी किया था।

अगर गंभीर दिल्ली के लिए क्रिकेट खेलते हुए ये पद लेते हैं तो डीडीसीए की यह प्रबंध समिति जब कोच और टीम का चयन करेगी तो उन्हें सीधा फायदा हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि उच्च न्यायालय द्वारा डीडीसीए के नियुक्त प्रशासक न्यायाधीश विक्रमजीत सेन ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

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उन्होंने आज पीटीआई से कहा, ‘‘गंभीर की नियुक्ति को लेकर मुझे सरकार से कोई अधिसूचना नहीं मिली है। किसी प्रबंध समिति के होने का मुझे पता नहीं है। मैं इस मामले में ज्यादा जानकारी के लिए खेल मंत्रालय को पत्र लिखूंगा। गंभीर सक्रिय क्रिकेटर है इसलिये मैं इस बात को लेकर पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हूं कि लोढा समिति की सिफारिशें उन्हें किसी तरह का प्रशासनिक पद लेने की अनुमति देती हैं या नहीं।’’ यह भी पता चला है कि अदालत द्वारा प्रशासक समिति की नियुक्ति के बाद डीडीसीए में इस तरह की कोई प्रबंध समिति नहीं है। किसी को नहीं पता कौन इस समिति के सदस्य हैं।

गंभीर के एक करीबी दोस्त ने कहा कि अगर हितों के टकराव का मुद्दा खड़ा होता है तो वह इस पद को नहीं लेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘गंभीर का फिलहाल संन्यास लेने का कोई इरादा नहीं है, वह क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे। अगर हितों में टकराव का मुद्दा होता है तो वह इस पद को नहीं लेंगे।’

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