हार्दिक पांड्या © Getty Images
हार्दिक पांड्या © Getty Images

टीम इंडिया के नए नवेले ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या ने हाल ही में स्पोर्ट्सस्टार लाइव  एक इंटरव्यू में बताया कि साल 2016 आईपीएल में उनके खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें भारतीय टीम से भी बाहर का रास्ता देखना पड़ा था, हालांकि इस चीज ने उनकी ट्रैक में वापस आने में मदद की। पांड्या साल 2016 वर्ल्ड टी20 और उसके पहले खेली गई सीरीजों में टीम इंडिया का अहम हिस्सा थे। लेकिन आईपीएल में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा, और उन्हें बीच टूर्नामेंट में ही मुंबई इंडियंस की टीम ने अंतिम एकादश में जगह देना बंद कर दिया। इसी खराब प्रदर्शन का ही असर था कि आईपीएल के बाद जिम्बाब्वे दौरे के लिए हार्दिक के नाम पर कोई विचार नहीं किया गया।

हार्दिक पांड्या कैसे उबरे बुरे वक्त से?

पांड्या ने कहा, “आप ये कह सकते हैं। जब मुझे टीम से निकाल दिया गया- मेरा मतलब है मुझे सिर्फ एक सीरीज में जिम्बाब्वे के खिलाफ नहीं शामिल किया गया। इस दौरान मेरा पास वक्त था कि मैं कड़ी मेहनत करूं। मैंने सोचा कि मुझे अपने गेम के कुछ पहलुओं पर काम करने की जरूरत है और धीरे-धीरे चीजें बदलना शुरू हो गईं।”

छक्कों की कहानी पांड्या की जुबानी:

जब भी पांड्या मैदान पर गार्ड लेते हैं, वह अक्सर मिड विकेट के ऊपर से छक्का लगाने को लेकर तत्पर दिखाई देते हैं। पांड्या इमाद वसीम, एडम जांपा, मिलिंदा पुष्पाकुमारा जैसे गेंदबाजों के खिलाफ लगातार तीन-तीन छक्के लगा चुके हैं। इसीलिए उनसे पूछा गया कि किस तरह की गेंदों पर वह छक्के मारते हैं।

इस पर पांड्या ने कहा, “मैंने गेंदों को मारने की कोशिश तभी से कर दी थी जब मैं अंडर-16 की ओर से खेलता था। मैं इस तरह का प्रयास करते हुए आउट भी हो जाता था। लेकिन ज्यादातार मौकों पर वह 30 यार्ड का घेरा पार ही कर लेता था, अगर छक्का नहीं तो चौका मिल जाता था। मुझे हमेशा से बड़े शॉट खेलना पसंद रहा है। मैंने बहुत प्रैक्टिस की है। मैंने हमेशा ही लंबे शॉट लगाने की कोशिश की है। मुझे इससे मजा आता है।”

पठान बंधुओं पर पांड्या की राय:

इस विस्तृत इंटरव्यू में पांड्या से पूछा गया कि क्या वह और उनके भाई क्रुणाल पांड्या जो इस समय मुंबई इंडियंस एवं इंडिया ए की ओर से खेलते हैं, वे किसी क्रिकेटर्स भाइयों की जोड़ी को आदर्श मानते हैं। इसका जवाब देते हुए हार्दिक ने फौरन पठान बंधुओं इरफान पठान और यूसुफ पठान का नाम लिया।

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पांड्या ने कहा, “पूरी तरह तो नहीं, लेकिन वड़ोदरा में बड़े होते हुए हमारे यहां इरफान पठान और यूसुफ पठान एक साथ खेलते थे। मेरा मतलब है कि हम सोचा करते थे कि एक साथ खेलना बेहतरीन है और हम भी साथ खेले। हम साथ खेलने के आकांक्षी नहीं थे, हम बस अपनी क्रिकेट का मजा ले रहे थे और उसे बेहतर करने की कोशिश कर रहे थे। हमने किसी क्रिकेटर को कभी कॉपी नहीं किया।”