hold your breath keep your fingers crossed is it the beginning of virat kohli 2 0
virat kohli century

बाएं हाथ के पेसर फरीद अहमद की हल्की सी छोटी गेंद। पारी के 19वें ओवर की दूसरी गेंद। विराट कोहली बैकफुट पर गए और गेंद को पुल कर दिया। कैमरे की नजरों ने गेंद का पीछा किया। और जब सफर समाप्त हुआ तो गेंद स्टैंड्स में थी। और इसके साथ ही 1020 दिन का इंतजार समाप्त हो गया। विराट ने अपना 71वां अंतरराष्ट्रीय शतक पूरा किया। नवंबर की 23 तारीख थी और साल 2019 था जब कोहली ने अपना पिछला शतक लगाया था। कोलकाता में बांग्लादेश के खिलाफ कोहली ने पिछली बार सैकड़ा पार किया।

जब बल्ला न चल रहा हो तो आवाजें शोर मचाती हैं। कोहली के साथ यही हो रहा था। अपने बल्ले से कई कीर्तिमान लिख चुके कोहली के लिए करियर में ऐसा शायद पहली बार हुआ। इंतजार हर दिन बढ़ने लगा। और हर बढ़ते दिन के साथ सवाल गहरा होने लगा। क्या कोहली फिर अपनी लय हासिल कर पाएंगे? वर्ल्ड कप की टीम में क्या कोहली की जगह बनती है? कोहली को कहां बल्लेबाजी करनी चाहिए? क्या कोहली युवाओं की जगह रोके हुए हैं? हर असफलता के साथ एक नया सवाल। एक नया विवाद और एक निराशा की श्रृंखला में एक और कड़ी। पर कोहली और टीम हर बार कहते रहे कि वे बाहर की आवाजों को नहीं सुनते। शायद यह सही है। लेकिन वे भी इनसान हैं। किसी पहाड़ पर बैठे कोई योगी नहीं। बातें सुनाई तो पड़ती ही हैं। असर कितना होता है, यह बात अलग है।

कोहली के शतक का इंतजार किया जाता रहा। पारी दर पारी। सीरीज दर सीरीज। टूर्नमेंट दर टूर्नमेंट। कोहली आते और शतक से महरूम रहते। उनके आउट होने के तरीकों पर सवाल उठे। उनकी फॉर्म पर प्रश्नवाचक चिह्न गहरा होता गया। आवाजें पहले सोशल मीडिया पर फिर टीवी कॉमेंट्री में उठने लगीं। इस बीच वह वक्त भी आया जब टीम में उनकी जगह पर भी बुदबुहाट होने लगी।

लेकिन, 8 सितंबर 2022 का दिन कोहली के यादगार बन गया। उन्होंने जैसे ही शतक पूरा किया स्टेडियम खुशी से झूम उठा। स्क्रीन पर देख रहे करोड़ों लोगों ने तालियां बजाई होंगी। लेकिन कोहली का अंदाज बदला हुआ दिखा। वह शतक के बाद जोश में नहीं, राहत में नजर आए। चेहरे पर मुस्कुराहट। बल्ला उठाया लेकिन लहराया नहीं। टी-शर्ट में हाथ डालकर उंगूठी निकाली और चूम लिया। कोहली ने पारी के बाद इस सेंचुरी को अनुष्का को डेडिकेट किया। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी हर मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़ी रहीं।

कोहली ने इंग्लैंड दौरे के बाद ब्रेक लिया। इंग्लैंड दौरा जो उनके लिए भुलाने वाला रहा। वह न वेस्टइंडीज गए और न ही जिम्बाब्वे। छह सप्ताह का ब्रेक। सवाल इस पर भी उठा। जब कोहली का बुरा वक्त चल रहा था तो महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने कहा था कि हर बल्लेबाज को किस्मत का साथ चाहिए होता है लेकिन कोहली को वह साथ नहीं मिल रहा। कोहली एशिया कप में लौटे। थोड़े बदले हुए। पांच पारियों में दो अर्धशतक और एक शतक के साथ। कुछ-कुछ अपनी लय हासिल करते हुए। यहां कभी-कभी किस्मत का साथ मिलता दिखा। अफगानिस्तान के खिलाफ भी उनका कैच छूटा। और कोहली ने इस मौके को भरपूर लूटा। एशिया कप में भारत के लिए विराट कोहली की फॉर्म ही हासिल-ए-टूर्नमेंट है।

यह वह वक्त था जब कोहली निराश लगते थे। हताश। थके हुए और शायद काम के बोझ के मारे हुए। छह सप्ताह के ब्रेक के बाद कोहली ठहरे हुए दिखे। इसकी झलक पाकिस्तान के खिलाफ मैच के बाद देखने को मिली। कोहली ठहरकर, संयम से जवाब दे रहे थे। कोई जल्दबाजी नहीं। कोई हड़बड़ी नहीं। कोई झल्लाहट नहीं। कोई प्रतिप्रश्न नहीं। क्या यह कोहली का नया अवतार है? क्या यह कोहली 2.0 है…?