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8 साल की उम्र में देखा था सपना, 5566 दिन बाद हुआ पूरा; सूर्यांश शेडगे ने सुनाई 2011 वर्ल्ड कप की रात की कहानी
सूर्यांश शेगडे ने भी उस जीत के बाद एक सपना देखा था. भारत के लिए खेलने का सपना. और आखिर 15 साल के इंतजार के बाद उनका यह ख्वाब पूरा हो गया
Published On Jul 01, 2026, 03:41 PM IST
Last UpdatedJul 01, 2026, 03:41 PM IST
नई दिल्ली: सूर्यांश शेडगे की उम्र तब 8 साल रही होगी जब महेंद्र सिंह धोनी ने वानखेड़े के मैदान पर वह यादगार छक्का लगाया था. और भारत ने 28 साल बाद वनडे वर्ल्ड कप अपने नाम किया था. उस जीत ने कई नन्ही आंखों को भारत के लिए खेलने का सपना दिखाया होगा. उनमें से एक सूर्यांश भी थे. भारत की जीत देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए थे. और तभी मुम्बई में जन्मे इस क्रिकेटर ने भारत के लिए खेलना तय कर लिया था.
एक विश्व कप जीत कई युवाओं को क्रिकेट खेलने और उस सपने को जीने की प्रेरणा देती है। भारतीय क्रिकेट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. 1983 में मिली विश्व कप जीत ने सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले, वीवीएस लक्ष्मण और सौरभ गांगुली जैसे कई क्रिकेटरों के मन में भारत के लिए खेलने का सपना जगाया। इसके बाद जब इन दिग्गजों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफलता हासिल की, तो उन्हें देखकर अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों ने भी टीम इंडिया की जर्सी पहनने का सपना संजोया.
5566 दिन बाद पूरा हुआ शेडगे का सपना
सूर्यांश को शायद यह उम्मीद नहीं रही होगी कि भारत की नीली कैप पहनने का मौका उन्हें इतनी जल्दी मिल जाएगा. लेकिन नीतीश कुमार रेड्डी के चोटिल होने के बाद उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टीम में चुना गया. और फिर रविवार को स्टॉर्मोंट के सिविल सर्विस क्रिकेट क्लब मैदान पर आयरलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में भारत के लिए डेब्यू किया. यानी नम आंखों से खुद से किया गया वह वादा अब पूरा हो रहा था.
23 साल का यह खिलाड़ी जब टीम इंडिया तक अपने सफर को याद करता है पहले-पहल वह उस शाम को याद करता है जब उसका अपना शहर मुम्बई थम गया था. उस जीत ने नन्हे सूर्यांश को एक लक्ष्य दिया. वह इमोशनल होकर याद करते हैं कि कैसे उस एक जीत ने उन पर गहरा असर डाला.
करोड़ों लोगों की तरह उस दिन सूर्यांश की आंखों में भी आंसू थे. पर ये आंखें खुशी से नम हुई थी. शेडगे ने कहा, ‘क्रिकेट देखते हुए मैं पहली बार तब रोया था, जब भारत ने 2011 का विश्व कप जीता था. उस रात भारतीय टीम को ट्रॉफी उठाते देखकर मेरे अंदर कुछ बदल गया. तभी मैंने तय कर लिया कि मुझे भी एक दिन सबसे बड़े मंच पर भारत की नीली जर्सी पहनकर उतरना है. उसी दिन से मैंने इस सपने को पूरा करने के लिए मेहनत शुरू कर दी.’
शेडगे ने जियोस्टार से कहा, ‘मुझे पता था कि यह सफर आसान नहीं होगा, लेकिन मैं इसके लिए पूरी मेहनत करने को तैयार था. जब पहली बार मैंने भारतीय टीम की जर्सी पहनी, तो उस एहसास को शब्दों में बयां करना मुश्किल था. सुबह जल्दी उठना, कड़ी मेहनत करना और कई त्याग करना, उस पल सब कुछ सफल लगा. बचपन से मैंने इसी दिन का सपना देखा था. भारतीय जर्सी पहनना मेरे लिए सिर्फ सपना पूरा होने जैसा नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है.’
आईपीएल में पंजाब किंग्स के लिए खेलने वाले शेडगे ने बताया कि टीम में नाम आने के बाद उन्हें किस-किसने कॉल किया. उन्होंने याद किया कि जो शुरुआती फोन आए थे उनमें से एक अर्शदीप सिंह का था. सूर्यांश बताते हैं कि कैसे बाएं हाथ के इस पेसर ने उनके साथ इमोशनल बातें की थीं.
शेडगे ने कहा, ‘जब मेरा भारतीय टीम में चयन हुआ, तो अर्शदीप सिंह पाजी ने मुझे वीडियो कॉल किया. उन्होंने मुझे बधाई दी और अपने चयन का अनुभव भी साझा किया. हमने कुछ देर बात की. वह पल मेरे लिए बेहद भावुक था. उस समय मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि मेरा सपना सच हो गया है. आज भी यह किसी सपने जैसा लगता है.’
सूर्यांश के लिए पहला मैच भले ही बहुत यादगार न रहा हो. लेकिन, सफर अभी लंबा है. और वह भी जानते होंगे कि इस सफर में मेहनत का कोई विकल्प नहीं.