how well rishabh pant played at edgbaston changed the game on his head

‘ऋषभ पंत को बाहर करो’, ‘वर्ल्ड कप में पंत की जगह नहीं’, ‘पंत में दम नहीं’- साउथ अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज के दौरान सोशल मीडिया पर ये टिप्पणियां आम थीं। पंत का बल्ला चल नहीं रहा था। ऊपर से कप्तानी का दबाव भी नजर आने लगा। पंत का आक्रामक अंदाज, काम नहीं आ रहा था। उनकी आक्रामकता, आलोचकों की नजर में लापरवाही बन गई। ऊपर से संजू सैमसन, ईशान किशन, केएस भरत और दिनेश कार्तिक जैसे खिलाड़ियों के नाम, उनके विकल्प के तौर पर पेश किए जाने लगे। जाहिर सी बात है दबाव बढ़ने लगा… वह खिलाड़ी, जिसे टीम का भविष्य बताया जाता रहा है, के भविष्य पर सवाल उठने लगे। लेकिन पंत ने जवाब दिया… और ऐसे मौके पर, ऐसा जवाब दिया कि ‘अब तेरी हिम्मत का चर्चा गैर की महफिल में है।’

कैसे पूरा हुआ शतक

स्टुअर्ट ब्रॉड की गेंद पर पंत ने पुल किया और दौड़ पड़े। शतक दो रन दूर था। और पंत ने वह दूसरा रन लेने का जोखिम उठाया। रफ्तार बढ़ानी पड़ी क्योंकि इस रन को पूरा करने में खतरा था। क्रीज दूर दिखी तो पंत ने छलांग लगा दी। गेंद के आने से पहले पंत का बल्ला क्रीज को लांघ चुका था। 25 साल के इस लड़के ने हेलमेट उतारा, आसमान की ओर देखा और दोनों हाथ हवा में उठा दिए। एक हाथ में बल्ला और दूसरे में हेलमेट थामे हुए। चेहरे पर मुस्कान थी। और संतोष भी। सिर्फ 89 गेंद पर यह सेंचुरी पूरी हुई। जी, यह टेस्ट क्रिकेट है… नए जमाने का टेस्ट क्रिकेट। और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ियों के मिजाज के साथ मेल खाता टेस्ट क्रिकेट।

विजय-रथ पर सवार थी इंग्लैंड

मैच से पहले की बात करें तों, न्यूजीलैंड को बुरी तरह पीटने के बाद इंग्लैंड के हौसले बुलंद थे। उसने टेस्ट क्रिकेट का अंदाज बदल कर खेला। नए कोच और कप्तान के साथ इंग्लैंड के अंदाज बदले हुए दिखे। संयम की जगह आक्रमण ने ले ली। इंग्लैंड की इस बल्लेबाजी को टेस्ट क्रिकेट 2.0 कहा गया। बल्लेबाजी के नए तरीके पर गेंदबाजी की अनुभवी धार भी रही। जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड के साथ ही नए मैथ्यू पॉट भी आए।

भारत के सामने थे सवाल

और भारत की बात करें तो तस्वीर अलग थी। राहुल चोटिल और कप्तान रोहित शर्मा बीमार- टीम इंडिया के सामने कई सवाल। न टीम की प्लेइंग इलेवन तय थी और सलामी बल्लेबाज। विराट कोहली का बल्ला रूठा हुआ था और श्रेयस अय्यर शॉर्ट पिच गेंदों से परेशान थे। कुल मिलाकर सीरीज जहां छोड़ी गई थी, वहीं से शुरू नहीं होती दिखी। भारत भले ही 2-1 से आगे था लेकिन ‘वो साल दूसरा था, ये साल दूसरा है। ‘

खराब रही शुरुआत

एजबेस्टन में 39 साल के एंडरसन ने भारतीय सलामी जोड़ी को पविलियन भेजा। शुभमन गिल तो दिल नहीं जीत पाए और इसके बाद पुजारा, जिन्हें ओपनिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, भी जीवनदान का फायदा भी नहीं उठा पाए। लंच तक भारत के दो विकेट गिर चुके थे। और फिर विराट कोहली भी 11 रन बनाकर चलते बने। अब कोहली को फैसला लेने में दिक्कत हुई या किस्मत रूठी थी, यह फैसला आप कर लें, लेकिन भारत की मुश्किलें तो बढ़ चुकी थीं। 98 के स्कोर तक पहुंचते-पहुंचते आधी टीम पविलियन में थी।

लेफ्टहेंडर्स ने सब राइट किया

ऐसे में पंत और जडेजा क्रीज पर एकजुट होते हैं। बाएं हाथ के इन दो बल्लेबाजों के सामने बड़ी चुनौती थी। और साथ में दुविधा भी कि आखिर खेला कैसे जाए। डिफेंसिव खेला जाए या आक्रमण करें।

क्रिकेट में कहते हैं ना- ‘अटैक इज द बेस्ट फॉर्म ऑफ डिफेंस।’ यानी आक्रमण सुरक्षा का सबसे अच्छा तरीका है। और पंत ने इसी राह को चुना। उन्होंने इंग्लैंड के हर गेंदबाज को बल्ले से जवाब देना शुरू किया। इंग्लैंड की रणनीति बिगड़ गई। भारत को आउट करने की जुगत में लगे इंग्लिश गेंदबाज अब नया प्लान सोचने लगे। हाल के वक्त में ऐसा ही क्रिकेट खेलने वाली इंग्लिश टीम को अब उसी की भाषा में जवाब मिलने लगा।

बल्ला ही नहीं दिमाग भी चलाया

पंत सिर्फ बल्ला नहीं घुमा रहे थे। बल्कि दिमाग भी चला रहे थे। उन्हें पता था कि अगर दबाव में आए तो इंग्लैंड जकड़ लेगा। उन्होंने इंग्लैंड को वह नहीं करने दिया जो वह चाहता था। बल्कि उन्हें कशमकश में डाल दिया। बेन स्टोक्स ऐंड कंपनी मिलकर यह सोचने लगे कि आखिर करें क्या। रन रोककर दबाव बनाएं या फिर इस उम्मीद में रहें कि पंत इसी आक्रमक अंदाज में कहीं बहक जाएंगे और कामयाबी मिल जाएगी। पर पंत इस मूड में नहीं थे।

काउंटर अटैक है पुरानी आदत

वैसे यह पहली बार नहीं है जब पंत ने टेस्ट क्रिकेट में भारत को मुश्किल से निकाला हो। गाबा हो या सेंचुरियन, ओवल हो या सिडनी- पंत काउंटर अटैक के जरिए कई बार विपक्षी टीम को चित कर चुके हैं।

शतरंज की बिसात पर हारता इंग्लैंड

आसमान से मिल रही मदद के चलते गेंद स्विंग हो रही थी। पंत ने इसका तोड़ निकाला। वह क्रीज से काफी बाहर आ गए। नतीजा गेंदबाज को लेंथ बदलनी पड़ी। और यही पंत चाहते थे। इंग्लैंड 22 गज की पिच पर खेली जा रही इस शतरंज में पिछड़ने लगा। पंत पुल भी खेल रहे थे और ड्राइव भी। पर एंडरसन की गेंद पर मारे गए उस रिवर्स स्कूप, जिस पर दो रन बने, ने 650 से ज्यादा विकेट हासिल कर चुके इस गेंदबाज को भी चौंका दिया। वह परंपरागत शॉट्स तो खेले ही लेकिन उनकी इनोवेशन ने असल में इंग्लैंड को परेशानी में डाला।

लीच की हवा निकाल दी

पंत ने जैक लीच की भी खूब खबर ली। न्यूजीलैंड के खिलाफ बाएं हाथ के स्पिनर लीच को काफी मदद मिली थी। पिच से भी और किस्मत से भी। लेकिन यहां सब उलट थी। लीच ने गेंद को हवा दी तो पंत ने कदमों का इस्तेमाल कर गेंद को हवा में भी भेज दिया। और जहां लीच ने लेंथ छोटी की तो कट और पुल जैसे तीर तरकश से निकले।

उंगलियां उठने का खतरा

पंत को मालूम था कि हालात मुश्किल हैं। और अगर इन हालात में वह आक्रामक शॉट खेलते हुए आउट हो गए तो सवाल गहरे हो जाएंगे। लेकिन उन्होंने वह जोखिम उठाया। और जोखिम का फायदा भी हुआ। सिर्फ 89 गेंद पर शतक पूरा हुआ। भारतीय विकेटकीपर्स में सबसे तेज। इस पंत ने दो रन पूरे किए और उधर भारतीय ड्रेसिंग रूम का माहौल बदल गया। जश्न मनाया जाने लगा। राहुल द्रविड़, भद्रजनों के खेल के भद्रपुरुष, भी कुर्सी से उछल पड़े। जोश में चिल्लाए और दोनों मुट्ठियां भींच कर हवा में लहराने लगे। जैसे कोई विजेता हो। टेस्ट क्रिकेट में यह पंत का पांचवां शतक था। इसमें 10 हाफ सेंचुरी भी जोड़ लीजिए, जिसमें से पांच नाइनटीज में हैं।

जडेजा बने सपोर्टिंग हीरो

पर पंत की इस चर्चा के बीच रविंद्र जडेजा का जिक्र होना बहुत जरूरी है। पंत की इस आक्रामकता को बैलेंस किया जडेजा ने। वह एक छोर पकड़कर खड़े हो गए। पंत जहां पंच लगा रहे थे वहीं जडेजा इस बात को पक्का कर रहे थे कि पंत ऐसा करते रहें। उनके धैर्य ने पंत को यह आजादी दी कि वह खुलकर खुद को अभिव्यक्त करें। दोनों के बीच 222 रन की पार्टनरशिप हुई। सिर्फ 38.3 ओवर में। रनरेट का हिसाब लगाएंगे तो 5.78 के करीब बैठेगा।

द्रविड़ ने पीठ थपथपाई

पंत आउट होकर लौटे तो 111 गेंद पर 146 रन बनाकर। ड्रेसिंग रूम पहुंचे तो सबने तालियां बजाकर स्वागत किया। राहुल द्रविड़ ने पीठ थपथपाई। और जडेजा 83 रन पर नाबाद रहे। उनका साथ मोहम्मद शमी दे रहे हैं। जिन्होंने 11 गेंद बाद खाता नहीं खोला है। और सोने पर सुहागा तो यह होगा कि शनिवार को जडेजा भी शतक पूरा करें।

पंत जब क्रीज पर उतरे तो भारत मुश्किल में था। दिन का खेल समाप्त होते-होते सवालों के जवाब इंग्लैंड को तलाशने हैं। और उन लोगों को भी जो पंत को टीम से बाहर करने की वकालत कर रहे थे…