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जमशेदपुर से नागपुर तक, गांगुली ने याद किए MS के किस्से, क्यों कहा, फेज-2 वाला धोनी मुझे पसंद नहीं
भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली ने महेंद्र सिंह धोनी से जुड़े कई किस्से याद किए हैं. उन्होंने बताया है कि कैसे जमशेदपुर धोनी को खेलते देखने चले गए थे.
Published On May 16, 2026, 12:29 PM IST
Last UpdatedMay 16, 2026, 12:29 PM IST
सौरभ गांगुली ने कहा कि मुझे फेज-2 का एमएस धोनी पसंद नहीं है
सौरभ गांगुली को भारतीय टीम के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में गिना जाता है. एक ऐसे कप्तान जिन्होंने भारतीय क्रिकेट की दिशा और दशा बदलने में अहम योगदान दिया. गांगुली की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम ने महान ऑस्ट्रेलियाई टीम को कड़ी टक्कर दी. कोलकाता के ईडन गार्डंस में उस यादगार जीत ने भारतीय क्रिकेट को हमेशा-हमेशा के लिए बदल दिया. गांगुली को भी श्रेय जाता है कि उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को टीम में मौका दिया. और टीम को नए सिरे से तैयार किया. इन युवा खिलाड़ियों में एक नाम महेंद्र सिंह धोनी का भी है. भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक धोनी को गांगुली ने कैसे और किसकी सलाह पर टीम का हिस्सा बनाया. और क्यों उन्हें धोनी का फेज-1 ज्यादा पसंद था. इसके बारे में उन्होंने एक हालिया पॉडकास्ट में खुलासा किया है.
सबा करीम की सलाह पर गांगुली ने धोनी को खेलते देखा
सौरभ गांगुली ने राज शमानी के पॉडकास्ट में उन्होंने धोनी से जुड़े भी कई किस्से बताए. उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने धोनी को टीम इंडिया का हिस्सा बनाया. गांगुली ने बताया कि टीम इंडिया के विकेटकीपर सबा करीम ने उन्हें धोनी के बारे में बताया था. गांगुली ने बताया कि करीम ने उनसे कहा था, ‘एक लड़का है बहुत लंबे-लंबे छक्के मारता है उसे देख लो.’ इसके बाद गांगुली धोनी की बल्लेबाजी देखने जमशेदपुर गए. गांगुली ने पॉडकास्ट में कहा, ‘मैं एमएस धोनी को देखने जमशेदपुर गया था. उसको पता भी नहीं था. वहां से उठाकर उसे इंडिया-ए में मौका दिया. वानखेड़े स्टेडियम पर 100 बनाए. छत पर छक्के मार रहा था. उसको टीम में लेना ही था. जो अच्छा खिलाड़ी है उसे फास्ट-ट्रैक करना ही चाहिए. वरना वह खत्म हो जाएगा. आपका खेल हमेशा अपने से ऊपर के लोगों के साथ खेलकर बढ़ता है.’
मुझे धोनी का दूसरा फेज इतना पसंद नहीं
गांगुली ने इसके साथ ही इस विकेटकीपर बल्लेबाज के करियर के दो चरणों की बात की. और कहा कि उन्हें पहला चरण ज्यादा पसंद था जब धोनी बहुत आक्रामक बल्लेबाजी करते थे.
उन्होंने कहा, ‘मैंने बहुत कम ऐसे खिलाड़ी देखे हैं जो महेंद्र सिंह धोनी जैसै छक्के लगाते हों. जब वह टीम में आए तो मैं कप्तान था. वह बहुत छक्के लगाते थे. इसके बाद महेंद्र सिंह धोनी का दूसरा फेज आया. मुझे पहले फेज का एमएस धोनी पसंद था.’
गांगुली से जब पूछा गया कि आखिर दो फेज में क्या अंतर था तो गांगुली ने कहा कि युवा धोनी ज्यादा आजादी और आक्रामकता के साथ खेलते थे. उन्होंने कहा, ‘वे छक्के लगाया करते थे. जब भी वह बैट उठाते तो मजे-मजे में छक्के लगाते. मुझे बाद वाला वह एमएस धोनी पसंद नहीं है जो सिंगल और डबल लेकर खेलता था. चलिए, बाद में वह इतने बड़े खिलाड़ी बने. भारत के लिए इतने बड़े कप्तान बने.’
जब धोनी ने गांगुली से कहा- आप कप्तानी करो
धोनी ने साल 2004 में गांगुल की कप्तानी में ही डेब्यू किया. और जब गांगुली ने अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला तो उसमें धोनी कप्तान थे. नवंबर 2008 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए उस मैच में पांचवें दिन धोनी ने गांगुली को टीम की कप्तानी करने को कहा. उस घटना के बारे में गांगुली ने बताया, ‘MS ने मुझसे कहा कि आप कप्तानी कर लो. मैंने उसे इनकार कर दिया. यह मेरे करियर का 113वां टेस्ट मैच था. मैच का आखिरी दिन. भारत टेस्ट मैच जीत रहा था. मैं बैटिंग कर चुका था और मानसिक रूप से मैं खेल से रिटायर हो चुका था. लेकिन उसने कहा कि नहीं आप कर लो. फिर मैंने चार-पांच ओवर कप्तानी की. फिर उसे दे दी कि भाई तू देख.’
महेंद्र सिंह धोनी 2007 में भारत के कप्तान बने. उनकी कप्तानी में भारत ने साल 2007 में खेला गया पहला टी20 वर्ल्ड कप. 2011 का वनडे वर्ल्ड कप और 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी जैसे बड़े खिताब जीते. वह भारत के सबसे सफल कप्तानों में शुमार हुए.