I was hit all over my body but was very determined not to give my wicket away: Cheteshwar Pujara
चेतेश्वर पुजारा (Getty images)

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ब्रिसबेन टेस्ट के आखिरी दिन जब भारतीय टीम 328 रनों का पीछा करते हुए आसानी से जीत की ओर बढ़ रही थी तब मेजबान टीम के तेज गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ शॉर्ट पिच गेंदो का इस्तेमाल शुरू कर दिया। पैट कमिंस (Pat Cummins) और मिशेल स्टार्क (Mitchell Starc) की बाउंसर गेंदो के निशाने पर टीम इंडिया के सीनियर बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) थे, जो सलामी बल्लेबाजों के आउट होने के बाद कप्तान अजिंक्य रहाणे के साथ पारी को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे।

गाबा टेस्ट के आखिरी दिन 33 साल के पुजारा को एक के बाद कई बाउंसर गेंद शरीर पर लगी, इस दौरान कई बार भारतीय फीजियो को भी मैदान पर बुलाना पड़ा। हेलमेट और अंगूठे पर जोरदार बाउंसर लगने के बाद भी पुजारा चट्टान की तरह मैदान पर टिके रहे और अर्धशतकीय पारी खेली।

पुजारा की इस पारी ने गाबा में टीम इंडिया की जीत में अहम योगदान दिया। पुजारा के अलावा शुबमन गिल (91) और रिषभ पंत (89) की अर्धशतकीय पारियों के दम पर भारत ने गाबा टेस्ट में 3 विकेट से जीत हासिल कर बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी पर 2-1 से कब्जा किया।

गाबा के अजेय दुर्ग पर विजय हासिल कर भारत लौटे पुजारा ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए बयान में ब्रिसबेन में खेली अपनी पारी को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा, “ये मुश्किल पारी थी। मुझे ऐसी कोई और पारी याद नहीं आती जहां मुझे पूरे शरीर पर इतनी बार गेंद लगी थी लेकिन मैंने अपना विकेट ना गंवाने पर डटा था।”

पुजारा ने कहा, “बतौर टीम हमारे पास एक योजनी थी और निजी तौर मैं पहले सेशन में अच्छी बल्लेबाजी करना चाहती थी। मुझे पता था कि शुरुआत अच्छी हुई है, ये सेशन ढाई घंटे का था, हमें उस सेशन में 35-37 ओवर डाले जाने की उम्मीद थी। अगर हम उसे सेशन में अच्छी शुरुआत करते तो हमारे पास टेस्ट जीतने या ड्रॉ कराने का अच्छा मौका होता।”

उन्होंने आगे कहा, “पहले सेशन में उनके ऊपर विकेट लेने का ज्यादा दबाव था। ये जरूरी था कि मैं शरीर पर गेंद लगने से ज्यादा परेशान ना हों क्योंकि उस पिच पर, उस एंड से बाउंस का आंकलन कर पाना मुश्किल था और ज्यादातर गेंदे जो मुझे शरीर पर लगी वो उसी एंड से थी। दूसरे एंड पर गेंद उतनी बाउंस नहीं हो रही थी। वो शॉर्ट गेंद करा रहे थे लेकिन गेंद शरीर पर आ रही थी।”

पुजारा से जब पूछा गया कि इतनी बार शरीर पर गेंद लगने के बाद क्या उन्होंने रिटायर हर्ट होने के बारे में सोचा तो भारतीय बल्लेबाज ने कहा, “कभी नहीं। रिटायर होना विकल्प ही नहीं था। मैं खुद को कहता कहा कि मैं यहां से आउट नहीं होउंगा। हां, जब उंगली पर गेंद लगी तो थोड़ी मुश्किल हुई क्योंकि दूसरे टेस्ट से पहले जब मैं अभ्यास कर रहा था तो मुझे उसी गेंद पर गेंद लगी थी। इसलिए मैं सिडनी टेस्ट के दौरान भी दर्द में था। और फिर गाबा में उसी जगह पर फिर से गेंद लगी। जब वहां (उंगली) गेंद लगी तो मुझे डर था कि मेरी उंगली टूट गई है। लेकिन नितिन पटेल, हमारे फीजियो आए और कहा कि अगर ये टूट भी गई है तो भी आप दर्द को काफी अच्छे तरीके से सह रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा कि मुझे दर्द के लिए दवा नहीं चाहिए और मैंने (बल्लेबाजी) जारी रखी। मैं ठीक से बल्ला भी नहीं पकड़ पा रहा था। मेरे लिए बैट पकड़ना मुश्किल था और इस वजह से मैं अपना स्वाभाविक खेल नहीं खेल पा रहा था। मुझे अपने शॉट खेलने के लिए बॉटम ग्रिप नहीं मिल रही थी। लेकिन मैंने खुद को कहा कि ‘ये सीरीज का सबसे अहम दिन है’। ये सेशन और इसके बाद वाला सेशन यानि कि लंच से टी का समय और आखिरी सेशन बहुत अहम है। इसलिए मैं कोई खतरा नहीं उठाना चाहता था। मैंने कहा कि मैं बल्लेबाजी जारी रखूंगा।”