आईसीसी विश्व कप में इस बार भारतीय टीम के बल्लेबाजों से ज्यादा गेंदबाजों की चर्चा हो रही है। भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने कहा कि यह भारत के लिए गर्व की बात है कि विश्व कप में टीम की गेंदबाजी उसकी ताकत के रूप में जानी जा रही है।

भारतीय कप्तान विराट कोहली के पास जसप्रीत बुमराह के रूप में डेथ ओवर्स विशेषज्ञ गेंदबाज है तो शमी के पास रफ्तार और स्विंग दोनों है। भुवनेश्वर कुमार के पास भले ही शमी जैसी रफ्तार नहीं लेकिन वो स्विंग के उस्ताद हैं।

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शमी ने आईएएनएस से कहा, “बीते 20-30 साल में, अगर आप भारतीय क्रिकेट का इतिहास देखेंगे तो हमेशा बल्लेबाजों का दबदबा रहा है। आप इसके लिए गेंदबाजों को दोष नहीं दे सकते क्योंकि जो विकेट बनाई जाती थीं वो गेंदबाजों की मददगार नहीं होती थी। पिछले पांच-सात साल में चीजें बदलनी शुरू हुई हैं। ईमानदारी से कहूं तो इसमें एक प्रक्रिया का पालन हुआ है। यह एक रात में नहीं हुआ है। हम एक ईकाई के तौर पर काम कर रहे हैं और इससे मदद मिल रही है।”

उन्होंने कहा, “अच्छी बात यह है कि वैराएटी के अलावा हमारे गेंदबाजों के पास तेजी भी है। कौशल और पेस का एक साथ होना हमारे तेज गेंदबाजी आक्रमण की विशेष पहचान है। यह एक सपने के सच होने जैसा है। मुझे इस बात पर गर्व होता है कि लोग आज के दौर में हमारे तेज गेंदबाजों की बात करते हैं। यह चीज ज्यादा सुनी नहीं जाती थी, लेकिन अब यह हमारी ताकत है।”

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शमी को कुछ दिन पहले तक टेस्ट गेंदबाज के रूप में देखा जाता था लेकिन हाल ही में उन्होंने वनडे में भी अच्छा किया है। इस पर शमी ने कहा, “मैं काफी दिनों से लिमिटेड ओवर्स की क्रिकेट खेल रहा हूं लेकिन हाल ही में हुई ऑस्ट्रेलिया सीरीज से मुझे आत्मविश्वास मिला। मैंने इसे आईपीएल में भी जारी रखा।”

उन्होंने कहा, “मैं अपने मौके का इंतजार कर रहा था क्योंकि मेरा सफेद गेंद से रिकॉर्ड अच्छा है। मैं दो साल से इंतजार कर रहा था और मेरे दिमाग में यही था कि मुझे जब भी मौका मिलेगा तो मुझे उसे किस तरह से भुनाना है। मैं दिखाना चाहता था कि मैं क्या कर सकता हूं।”