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विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के दौरान रोटेशन पॉलिसी अपनाने पर ईसीबी पर भड़के पूर्व कप्तान इयान बॉथम

टेस्ट टीम के कप्तान जो रूट ने भी माना था कि इस पॉलिसी की वजह से टीम को काफी नुकसान हो रहा है।

इयान बॉथम (File photo)

पूर्व दिग्गज इयान बॉथम ने पिछले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप टूर्नामेंट के दौरान रोटेशन नीति को अपनाने के लिए इंग्लैंड क्रिकेट टीम की आलोचना की।

इस पॉलिसी के तहत ईसीबी ने पिछले साल खेली गई कई अहम टेस्ट सीरीज के दौरान जॉस बटलर, जेम्स एंडरसन, स्टुअर्ट ब्रॉड, मोइन अली, मार्क वुड और जॉनी बेयरस्टो जैसे अपने प्रमुख खिलाड़ियों को रोटेट किया था। गौरतलब है कि इन सीरीजों में भारत दौरे पर खेले गए चार टेस्ट मैच भी शामिल थे, जहां मेहमान टीम को 1-3 से हार का सामना करना पड़ा था।

भारत के खिलाफ सीरीज हार के साथ ही इंग्लैंड के टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में पहुंचने की आखिरी उम्मीद भी टूट हई।

डेली मेल में लिखे अपने कॉलम में बॉथम ने रोटेशन पॉलिसी की जमकर आलोचना की। उन्होंने लिखा, “मुझे यकीन नहीं है कि हम सही खिलाड़ी चुन रहे हैं। रोटेशन, मुझे लगता है, अब तक का सबसे बड़ा भार है। बिल्कुल बकवास।”

पूर्व दिग्गज ने लिखा, “मैं आपको बताता हूं कि, जब मैं खेल रहा था, तो मैं किसी को मुझसे ये कहते हुए देखना चाहता था ‘अच्छा किया, लेकिन आप अगले मैच में आराम कर रहे हैं’, नहीं मैं आराम नहीं कर रहा हूं। गेंदबाजी करो, फिट बनो और गेंदबाजी करके फि रहो।”

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बॉथम पहले शख्स नहीं हैं तो बोर्ड की रोटेशन पॉलिसी के खिलाफ हैं। टेस्ट टीम के कप्तान जो रूट ने खुद माना था कि इस पॉलिसी की वजह से टीम को काफी नुकसान हो रहा है।

अब जबकि रूट की टीम के सामने भारत के खिलाफ घरेलू सीरीज और फिर एशेज की चुनौती है तो देखना होगा कि बोर्ड रोटेशन पॉलिसी को लेकर अपने विचार बदलती है या नहीं।

बॉथम ने कहा कि पिछले महीने न्यूजीलैंड के खिलाफ घर पर 0-1 से टेस्ट सीरीज हारने के बाद इंग्लैंड टीम की कमजोर बल्लेबाजी खुलकर सामने आ गई हैं।

उन्होंने लिखा, “मुझे लगता है कि हमारी बल्लेबाजी एक बड़ी चिंता है। पिछले महीने, इंग्लैंड के पास लॉर्ड्स में एक बड़ा मौका था जब उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ आखिरी दिन रनों का पीछा करना था। लोग लाइव खेल देखने के लिए महीनों और महीनों से इंतजार कर रहे थे और आखिरी पारी में इस तरह से बिना किसी इंटेट के बल्लेबाजी करना बेहद शर्मनाक था।”

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पूर्व ऑलराउंडर ने आगे कहा, “मैंने सोचा ‘तुम लोगों को थोड़ा जागने की जरूरत है, आप जनता पर भरोसा करते हैं’। उनके ऐसा (रनों का पीछा) ना करने का कारण ये था कि जॉस बटलर और बेन स्टोक्स नहीं खेल रहे थे। उनके ना होने से बाकी खिलाड़ियों को आगे आने का मौका मिला था। मुझे लगा ये बेहद कमजोर बहाना था। ईमानदारी से कहूं तो उनके साथ वही हुआ जिसके वो हकदार थे।”

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