कोरोना वायरस (Coronavirus) के बढ़ते संक्रमण से बचाव के लिए ऑस्ट्रेलिया (Australia) और न्यूजीलैंड (New Zealand) के बीच पहला वनडे मैच खाली स्टेडियम में बिना दर्शकों के आयोजित किया गया। इस महामारी की वजह से कई खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन बिना दर्शकों के या फिर इंडोर फैकल्टी में हो रहा है। जिससे आयोजक और फैंस दुखी हैं लेकिन पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान इयान चैपल (Ian Chappell) का कहना है कि खिलाड़ियों को अच्छा प्रदर्शन करने के लिए भीड़ की जरूरत नहीं होती।

13 मार्च को सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में खाली स्टैंड्स के सामने आयोजित हुए सीरीज के पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को 71 रन से हराया। इसके बाद बढ़ते खतरे को मद्देनजर रखते हुए तीन मैचों की सीरीज रद्द कर दी गई।

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर चैपल ने ईएसपीएन क्रिकइन्फो से कहा, ‘‘मेरा मानना है कि एक खिलाड़ी को अच्छे प्रदर्शन के लिए भीड़ की जरूरत नहीं है। करीबी मुकाबलों का रोमांच ही इसके लिए काफी है। चौकों-छक्कों के बीच एससीजी पर खामोशी छाई हुई थी। ऐसे माहौल में खेल का मजा लेकर अच्छा लगा जहां आप अपने आपको सोचते हुए सुन सकते हैं।’’

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चैपल ने कोरोना वायरस के चलते खेल जगत पर पड़ रहे प्रभाव की तुलना प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के समय हुए नकारात्मक प्रभाव से की। उन्होंने कहा, ‘‘लगभग सभी क्रिकेट मैचों का रद्द होना पहली बार हुआ है। और इससे लग रहा है कि हम दो विश्व युद्धों वाले बुरे दौर में पहुंच गए हैं। पहले विश्व युद्ध की वजह से 1914 में टेस्ट मैच रद्द कर दिए गए थे और 1920 तक शुरू नहीं हो पाए थे। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ये अंतर और बड़ा था, अगस्त 1939 से मार्च 1946 तक। उस समय के दो बड़े प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट- काउंटी क्रिकेट और शेफील्ड शील्ड दोनों ही युद्ध की वजह से रद्द हो गए।”

पूर्व क्रिकेटर ने कहा, “बिना दर्शकों को अभिवादन के भी ये प्रतिद्वंदी क्रिकेट है। मैच खत्म होने पर अलग ही नजारा देखने को मिला। विपक्षियों ने ना हाथ मिलाए और ना ही गले मिले लेकिन कई और तरीकों से दूर रहकर भी एक दूसरे का अभिवादन किया। ये निश्चित तौर पर मुश्किल और अजीब समय है लेकिन हमारी प्राथमिकता स्वास्थ्य है।”