युवराज सिंह और विराट कोहली
युवराज सिंह और विराट कोहली

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने क्रिकेट नियमों में हाल ही में तब्दीलियां की हैं। ये नियम हेलमेट को लेकर बनाए गए हैं। ब्रिटिश सुरक्षा नियमों के तहत कुछ खास हेलमेट बनाए गए हैं और इन्हें एक फरवरी से पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। ये नियम पुरुष और महिला क्रिकेटरों पर सामान्य रूप से लागू किए जाएंगे। अगर खिलाड़ी हेलमेट पहनने में आनाकानी करते हैं तो पहले तो उन्हें आधिकारिक चेतावनी दी जाएगी। लेकिन इसके बाद भी अगर नियमों का उल्लंघन किया जाएगा तो खिलाड़ी को एक मैच के लिए निलंबित कर दिया जाएगा। आईसीसी के जनरल मैनेजर (क्रिकेट) ज्योफ एलार्डिस ने कहा कि आईसीसी बल्लेबाजों को सबसे सुरक्षित हेलमेट मुहैया कराना चाहता है। उन्होंने कहा कि कई टीमों ने इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि साल 2015 में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर फिलिप ह्यूज की मौत सिर में गेंद लगने से हो गई थी। शॉन एबॉट की गेंद उनके हेलमेट के पिछले हिस्से में जा टकराई थी जिससे उन्हें असहनीय दर्द हुआ था और थोड़ी देर बाद उनकी मृत्यु हो गई थी। वर्तमान हेलमेट जो क्रिकेट में इस्तेमाल किए जा रहे हैं उनमें पीछे की ओर सुरक्षित कवच नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए आईसीसी ने नए प्रकार के हेलमेट बनाए हैं। [ये भी पढ़ें: लक्ष्य का सफल पीछा करते हुए सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बने विराट कोहली]

कैसे शुरू हुआ क्रिकेट में हैलमेट का प्रचलन: मैदान में खतरनाक गेंदबाजी को लेकर चर्चा 1932-33 में एशेज सीरीज के दौरान भी की गई थी जब इंग्लैंड के गेंदबाजों ने ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाजों के शरीर को निशाना बनाते हुए लगातार शॉर्ट पिच गेंदों से उनका स्वागत किया था। बाद में 70 के दशक के शुरुआत में वेस्टइंडीज के गेंदबाजों की आग उगलती हुई गेंदों ने बल्लेबाजों को हैलमेट पहनने पर मजबूर कर दिया। इस समय वेस्टइंडीज टीम में माइकल होल्डिंग, एंडी रॉबर्ट और वनबर्न होल्डर जैसे तेज गेंदबाजों की तिकड़ी गेंदबाजी का प्रभार संभाला करती थी। इनकी तेज रफ्तार वाली बाउंसर गेंदों को झेलना कई बार बल्लेबाजों के लिए बेहद मुश्किल होता था। भारत के क्रिकेटर नरीमन कॉन्ट्रेक्टर ने वेस्टइंडीज में क्रिकेट गेंद से घायल हो जाने के बाद क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी।

क्रिकेट में हेलमेट का इस्तेमाल 1970 के बाद से धीरे-धीरे प्रचलन में आया। हालांकि इस दौर में क्रिकेटर अपने आपको घायल होने से बचाने के लिए एक विशेष प्रकार की टोपी का इस्तेमाल किया करते थे। हैलमेट का इस्तेमाल पहली बार ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ग्राहम नील ने सन् 1978 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले जाने वाले मैच से पहले किया। इसके बाद यह हैलमेट क्रिकेट में बेहद लोकप्रिय हुआ और बाद में हैलमेट को विश्व के ज्यादा से ज्यादा क्रिकेटर वरीयता देने लगे। वेस्टइंडीज के विवियन रिचर्डस ने अपने पूरे क्रिकेट जीवन में हेलमेट के साथ खेलने में खुशी जाहिर नहीं की और वह मैदान पर बिना हैलमेट के खेलते हुए जाते थे।

क्रिकेट की शुरुआत में एक अलग तरह के हेलमेट का इस्तेमाल किया जाता था जिनमें हवा आने जाने की जगह नहीं रहती थी जिसके कारण यह काफी गर्म हो जाता था और बल्लेबाज को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। बाद के सालों में इन हैलमेटों को आधुनिक हैलमेटों ने प्रतिस्थापित किया और इन नए हैलमेटों को खिलाड़ियों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया। इन हैलमेटों का निर्माण ढले हुए प्लास्टिक व फाइबर से किया गया। साथ ही हैलमेट को मजबूती देने के लिए दोनों कानों के करीब स्टील की तिल्लियां लगाई गईं। साथ ही खोपड़ी में हवा आने जाने के लिए पर्याप्त छिद्र बनाए गए। सन् 1990 के बाद से हेलमेट को क्रिकेट में अनिवार्य कर दिया गया।