धोनी और विराट कोहली © Getty Images
धोनी और विराट कोहली © Getty Images

चैंपियंस ट्रॉफी के 11वें मुकाबले में टीम इंडिया ने द.अफ्रीका के खिलाफ टॉस जीता और पहले गेंदबाजी का फैसला किया। विराट कोहली का ये फैसला टीम इंडिया पर भारी पड़ सकता है क्योंकि अगर पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालें तो टीम इंडिया ने द.अफ्रीका के खिलाफ जीत से ज्यादा हार का ही मुंह देखा है। द.अफ्रीका के खिलाफ लक्ष्य का पीछा करते हुए पिछले 7 वनडे में भारत एक भी मैच नहीं जीता है। मतलब द.अफ्रीका के गेंदबाज हमेशा भारतीय बल्लेबाजों के लिए रोड़ा साबित हुए हैं।

टीम इंडिया पिछले 6 सालों से लक्ष्य का पीछा करते हुए द.अफ्रीका को हरा नहीं सकी है। साल 2011 में टीम इंडिया ने सेंचुरियन और पोर्ट एलिजाबेथ में 33 और 48 रनों से मैच गंवाया। इसके बाद 2013 में जोहानसबर्ग और डरबन में 141 और 134 रनों की बड़ी हार झेली। 2015 में अपनी सरजमीं पर भी टीम इंडिया लक्ष्य का पीछा करते हुए हारी। द.अफ्रीका ने कानपुर, राजकोट और मुंबई में टीम इंडिया को लक्ष्य तक नहीं पहुंचने दिया। ये भी पढ़ें-चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंचेगा पाकिस्तान? सुनिए सचिन तेंदुलकर का बयान

पिछले 7 सालों के रिकॉर्ड की बात करें तो भारत और द.अफ्रीका के बीच कुल 18 मैच खेले गए हैं जिसमें से 16 मुकाबले पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ने जीते हैं। द.अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 9 और टीम इंडिया ने 7 मैच जीते। दो ही बार चेज करते हुए टीम को जीत मिली। वैसे आईसीसी के नॉक आउट मैचों की बात करें तो लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत का रिकॉर्ड कुछ खास नहीं है। टीम इंडिया ने आईसीसी टूर्नामेंट में अबतक 11 मुकाबले खेले हैं जिसमें से उसे 5 में ही जीत मिली है। 4 मैचों में टीम इंडिया को हार देखनी पड़ी है। जबकि दो मुकाबलों का कोई नतीजा नहीं निकला है।