तो क्‍या अब मैच से पहले नहीं होगा टॉस !

इंटरनेशनल क्रिकेट में टॉस की परंपरा इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच 1877 में खेले गए पहले टेस्ट मैच से ही चली आ रही है।

Edited By : Kamlesh Rai |May 17, 2018, 07:57 PM IST

Published On May 17, 2018, 07:57 PM IST

Last UpdatedMay 17, 2018, 07:57 PM IST

Toss is sometimes a deciding factor in Tests (FILE PHOTO) © Getty Images

क्रिकेट में हमेशा से टॉस की भूमिका अहम रही है। लेकिन जरा सोचिए जब मैच से पहले ‘सिक्‍का’ उछालने की परंपरा को खत्‍म्‍ा कर दिया जाए तो क्‍या होगा।इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) की क्रिकेट समिति की मुंबई में 28 और 29 मई को होने वाली बैठक में इसकी प्रांसगिकता और निष्पक्षता पर चर्चा की जाएगी।

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‘ईएसपीएनक्रिकइंफो’ की रिपोर्ट के अनुसार, ‘टेस्ट क्रिकेट से मूल रूप से जुड़े टॉस को खत्म किया जा सकता है। आईसीसी क्रिकेट समिति इस पर चर्चा करने के लिए तैयार है कि क्या मैच से पहले सिक्का उछालने की परंपरा समाप्त की जाए जिससे कि टेस्ट चैंपियनशिप में घरेलू मैदानों से मिलने वाले फायदे को कम किया जा सके।’

इंटरनेशनल क्रिकेट में टॉस की परंपरा इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच 1877 में खेले गए पहले टेस्ट मैच से चली आ रही है। इससे यह तय किया जाता है कि कौन सी टीम पहले बल्लेबाजी या गेंदबाजी करेगी। हालांकि अब इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाए जाने लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस परंपरा के कारण मेजबान टीम को अनुचित लाभ मिलता है।

भारत में भी घरेलू स्तर पर इसे हटाने का प्रस्ताव आ चुका है

कुछ समय पहले भारत में भी घरेलू स्तर पर इसे हटाने का प्रस्ताव आया था लेकिन उसे नकार दिया गया था। वर्ष 2016 में काउंटी चैंपियनशिप में टॉस नहीं किया गया। इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने दावा किया था कि इस कदम के बाद मैच लंबे चले तथा बल्ले और गेंद के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।

आईसीसी क्रिकेट समिति में ये हैं शामिल

आईसीसी क्रिकेट समिति में पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले, एंड्रयू स्ट्रॉस, महेला जयवर्धने, राहुल द्रविड़, टिम मे, न्यूजीलैंड क्रिकेट के मुख्य कार्यकारी डेविड व्‍हाइट, अंपायर रिचर्ड केटलबोरो, आईसीसी मैच रेफरी प्रमुख रंजन मदुगले, शॉन पोलाक और क्लेरी कोनोर हैं।

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