ICC will take a “common sense approach” to on-field protests over the killing of George Floyd

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल का कहना है कि अगर अगले महीने क्रिकेट के दोबारा शुरू होने पर अगर मैच के दौरान नस्लवाद के विरोध में प्रदर्शन किए जाते हैं तो वो इस मामले को कॉमन सेंस के साथ संभालेंगे।

अमेरिका में 46 साल के जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस कस्टडी में हत्या किए जाने के बाद पूरे देश में नस्लवाद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। वहीं सोशल मीडिया पर भी #BlackLivesMatter हैशटैग के जरिए दुनिया भर के लोग इस मुहिम से जुड़ रहे हैं।

आईसीसी हमेशा से ही खिलाड़ियों के राजनीतिक मुद्दों पर आवाज उठाने के खिलाफ रहा है। लेकिन इस बार अपने आधिकारिक बयान में इस संस्था ने कहा, “आईसीसी नस्लवाद के खिलाफ खड़ा है और अपने खेल की विविधता पर गर्व करता है। हम खिलाड़ियों के एक न्यायपूर्ण समाज के लिए अपने समर्थन को व्यक्त करने के लिए इस मंच का इस्तेमाल करने का समर्थन करते हैं।”

बयान में आगे कहा गया, “हम इस मुद्दे पर सामान्य ज्ञान दृष्टिकोण का उपयोग करेंगे और मैच अधिकारियों द्वारा मामले के आधार पर उनका मूल्यांकन किया जाएगा।”

घुटने टेकना, ब्लैक लाइव्स मैटर अभियान में अपना समर्थन जताने का एक प्रतीक बन गया है। विंडीज कप्तान जेसन होल्डर का कहना है कि वो इंग्लैंड के खिलाफ जुलाई में होने वाली टेस्ट सीरीज के दौरान अपने साथी खिलाड़ियों के साथ घुटने टेकने पर विचार करेंगे।

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इससे पहले मशहूर फुटबॉल क्लब आर्सेनल के खिलाड़ियों ने मैदान पर घुटने टेककर नस्लवाद के खिलाफ प्रदर्शन में अपना समर्थन जताया।

आईसीसी ने पारंपरिक तौर पर राजनीतिक मामले से हमेशा दूरी बनाकर रखी है। इसी वजह से पिछले साल इंग्लैंड में हुए विश्व कप के दौरान भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी को अपने दस्ताने से एक सेना के प्रतीक चिन्ह को हटाने के लिए मजबूर किया गया था।

साथ ही इंग्लैंड के ऑलराउंडर मोइन अली पर 2014 में “सेव गाजा” और “फ्री फिलिस्तीन” के नारे लगाने वाले रिस्टबैंड पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।