भारत दौरे पर आई इंग्लैंड की टीम इन दिनों भारत के स्पिन गेंदबाजों के सामने लाचार दिख रही है. चेन्नई में पहला टेस्ट मैच जीतने के बाद मेहमान टीम अगले दोनों टेस्ट में स्पिनरों के खिलाफ बुरी तरह ढेर हो गई और अब वह मौजूदा टेस्ट सीरीज में 2-1 से पिछड़ गई है. अहमदाबाद में पिंक बॉल से खेले गए टेस्ट में इंग्लैंड की टीम दो ही दिन में हार गए. भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज दिलीप वेंगसरकर (Dilip Vengsarkar) ने इंग्लैंड के बल्लेबाजों को स्पिन बॉलिंग से सही से खेलने के बारे खास सलाह दी है.

भारत के लिए 116 टेस्ट मैच खेलने वाले वेंगसरकर ने ऐसे तरीके बताए, जिससे कि ऐसी पिचों पर स्पिनरों का सामना किया जा सके. भारत ने मुश्किल विकेट पर आखिरी दो टेस्ट जीते हैं और वेंगसरकर का कहना है कि ऐसी पिचों पर बल्लेबाजी करते समय बल्लेबाजों को कई बातों का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि सबसे तो बल्लेबाजों को गेंद की पहली लाइन में आना बहुत जरूरी है.

उन्होंने कहा, ‘हमारे (भारत) के लिए फायदा यह था कि हम गुणवत्तापूर्ण स्पिनरों के खिलाफ स्थानीय क्रिकेट और घरेलू क्रिकेट खेलने के आदी हैं. जिससे हमें काफी मदद मिली. आमतौर पर आप देखते हैं कि जब गेंद सीम कर रही है या टर्न हो रही है, तो आपको रनों के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी. जब गेंद घूम रही होती है, तो किसी को बहुत देर तक खेलना चाहिए. इसके अलावा, आपको यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि डिफेंस करने के लिए आपका बल्ला पहली लाइन में होना चाहिए.’

रविचंद्रन अश्विन के खिलाफ बल्लेबाजी करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इस पर उन्होंने कहा, ‘सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको यह देखना होगा कि आप किस तरह के विकेट पर बल्लेबाजी कर रहे हैं और फिर उसी के अनुसार आप परिस्थितियों के अनुसार ढलते हैं. अश्विन टॉप क्लास के स्पिनर हैं. इसलिए जब आप टॉप क्लास स्पिनर की भूमिका निभा रहे होते हैं, तो आप जानते हैं कि वह किसी चीज पर निर्भर होगा. उन्हें अपनी आस्तीन पर कुछ और (अतिरिक्त) विविधता मिली है, इसलिए आपको यह अनुमान लगाना होगा कि वह आगे क्या करने वाले हैं. यह बहुत महत्वपूर्ण है. यह सब विकेट और मैच की स्थिति पर निर्भर करता है. आप यह नहीं कह सकते कि मैं इस तरह या उस तरह से बल्लेबाजी करूंगा, आपको तब और वहां सुधार करना होगा.’

वेंगसरकर को लॉडर्स मैदान से काफी लगाव था. वह लॉडर्स में सर्वाधिक 3 टेस्ट शतक लगाने वाले एकमात्र विदेशी बल्लेबाज हैं. यह पूछे जाने पर कि ये कैसे संभव हुआ तो 64 वर्षीय वेंगसरकर ने कहा, ‘उन दिनों इंग्लैंड का दौरा करते समय, हम काउंटी टीमों के खिलाफ अधिक मैच खेलते थे. यानी टेस्ट क्रिकेट के बाहर के मैच. इससे हमें विशेषकर इंग्लैंड में परिस्थितियों के अनुकूल होने में मदद मिली. एक बार जब आप परिस्थितियों के अनुकूल हो जाते हैं, तो आप बीच में अधिक समय बिता सकते हैं और रन बना सकते हैं, ताकि आपको आत्मविश्वास मिले. इसने मुझे आत्मविश्वास दिया.’

इनपुट : IANS