ind vs sl sri lanka have forgotten how to win matches says muttiah muralitharan
मुथैया मुरलीधरन © IANS

मंगलवार की रात श्रीलंका की टीम भारत (IND vs SL) के खिलाफ खेले गए दूसरे वनडे में जीती बाजी हार गई. 276 रन का पीछा करने उतरी टीम इंडिया एक वक्त पर 160 रन पर 6 और 193 रन पर अपने 7 विकेट गंवा चुकी थी. इसके बावजूद भारत ने अपने पुछल्ले बल्लेबाजों के दम पर आखिरी 83 रन भी जोड़कर 3 विकेट से यह मैच अपने नाम कर लिया. श्रीलंका की इस जीती हुई बाजी को हारत देख महान ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन (Muttiah Muralitharan) काफी आहत नजर आए. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे उनकी टीम जीतना ही भूल चुकी है.

टेस्ट और वनडे में सर्वाधिक विकेट लेने का वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले मुरलीधरन ने कहा, ‘टीम पिछले कुछ वर्षों में भूल गई है कि जीत कैसे दर्ज की जाती है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि देश में इस समय खेल मुश्किल हालात से गुजर रहा है. मुरलीधरन ने ‘ईएसपीएनक्रिकइंफो’ से कहा, ‘मैंने पहले भी आपसे कहा है, श्रीलंका की टीम जीतने का तरीका भूल गई है. पिछले इतने वर्षों में वे भूल गए हैं कि जीत कैसे दर्ज की जाती है. यह उनके लिए मुश्किल समय है क्योंकि उन्हें नहीं पता कि जीत कैसे हासिल की जाती है.’

लेग स्पिनर वानिंदु हसारंगा ने 3 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए, जिससे 35.1 ओवर में भारत का स्कोर सात विकेट पर 193 रन हो गया था. लेकिन शनाका ने अंतिम ओवरों की गेंदबाजी के लिए अपने ओवर बचाकर बड़ी गलती की.

मुरलीधरन ने कहा, ‘मैंने आपसे पहले ही कहा था कि अगर श्रीलंका 10-15 ओवर में तीन विकेट चटका लेता है तो भारत को जूझना पड़ेगा और असल में भारत को जूझना पड़ा. दीपक चाहर और भुवनेश्वर कुमार के शानदार प्रयासों से वे जीत दर्ज कर पाए.’

उन्होंने कहा, ‘साथ ही उन्होंने (श्रीलंका) ने कुछ गलतियां कीं. उन्हें वानिंदु हसारंगा के ओवर बचाकर नहीं रखने चाहिए थे और उनसे पहले ही गेंदबाजी करानी चाहिए थी. उनसे गेंदबाजी कराके विकेट हासिल करने का प्रयास करना चाहिए था.’

49 वर्षीय इस पूर्व दिग्गज स्पिनर ने कहा, ‘अगर वे भुवनेश्वर और चाहर में से एक विकेट हासिल कर लेते तो निचले क्रम के दो बल्लेबाजों के बचे होने से प्रति ओवर 8 से 9 रन बनाना मुश्किल होता. उन्होंने गलती की लेकिन यह एक अनुभवहीन टीम है.’

श्रीलंका के कोच मिकी ऑर्थर को खेल के अंतिम लम्हों में हताशा में इशारे करते हुए देखा गया लेकिन मुरलीधरन ने कहा कि कोच को धैर्य रखना चाहिए था और अपना संदेश नए कप्तान तक पहुंचाना चाहिए था.