टीम इंडिया  © AFP
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बांग्लादेश के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में टीम इंडिया का जीतना निश्चित है, जी हां चैंपियंस ट्रॉफी में भारत के आंकड़ें तो यही दर्शाते हैं। पिछले सीजन की विजेता भारतीय टीम रनों का पीछा करते हुए आज तक चैंपियंस ट्रॉफी में एक भी नॉक आउट मैच नहीं हारी है। भारतीय टीम ने अभी तक चैंपियंस ट्रॉफी में दो नॉक आउट मैचों में पहले गेंदबाजी की है और दोनों में ही भारत ने जीत हासिल की है। रनों की पीछा करना टीम इंडिया की सबसे बड़ी ताकत रही है, वहीं महेंद्र सिंह धोनी और फिर विराट कोहली के आने से ये ताकत और भी बढ़ गई है।

भारतीय टीम ने पहला नॉक आउट मैच 2000 की चैंपियंस ट्रॉफी में केन्या के खिलाफ नैरोबी, जिमखाना में खेला था। इस क्वार्टर फाइनल मैच में भारत के कप्तान सौरव गांगुली ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया था। भारत ने ये मैच आठ विकेट से जीत था। इस मैच में भारत की ओर से युवराज सिंह, जहीर खान और विजय दहिया ने अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू किया था। गौरतलब है कि आज युवराज अपना 300वां वनडे मैच खेल रहे हैं जबकि जहीर खान ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। भारत ने इस सीजन साउथ अफ्रीका के खिलाफ करो या मरो के मुकाबले में भी रनों की पीछा करते हुए आठ विकेट से जीत दर्ज की थी। [ये भी पढ़ें: आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी, भारत बनाम बांग्लादेश: शुरुआती झटकों के बाद बांग्लादेश की पारी संभली]

टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली को तो चेज मास्टर के नाम से जाना जाता है। कोहली ने बांग्लादेश के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला भी इसीलिए किया क्योंकि वह जानते हैं कि टीम इंडिया के लिए लक्ष्य का पीछा करना हमेशा ही सफल रहा है।