कोलकाता के ईडन गार्डन में जारी पिंक बॉल टेस्‍ट में चेतेश्‍वर पुजारा ने 55 रन की पारी खेली। जिसके बाद वो इबादत हुसैन की गेंद पर शादमान इस्‍लाम को कैच दे बैठे। दिन का खेल खत्‍म होने के बाद पुजारा ने पिंक बॉल का सामना करने में आ रही समस्‍याओं के बारे मे बात की।

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चेतेश्‍वर पुजारा ने कहा, ‘‘फ्लड लाइट में बल्लेबाजी करने में मुश्किलें पेश आई। पहला सेशल बल्लेबाजी के लिये थोड़ा आसान था। लेकिन जब फ्लड लाइट चालू हुई तो गेंद थोड़ी ज्यादा स्विंग करने लगी। धूप की रोशनी में गेंद देखना आसान होता है, लेकिन सूरज ढलने के बाद गेंद का सामना करने में काफी मुश्किलें पेश आती हैं.’’

चेतेश्‍वर पुजारा भारत के घरेलू क्रिकेट में पिंक बॉल से दोहरा शतक जड़ चुके हैं। उन्‍होंने कहा, ‘‘गेंदबाजी के नजरिए से शामका वक्‍त हमारे लिए सही समय था। गेंद स्विंग कर रही थी और हमने सोचा कि हम जल्दी विकेट चटका सकते हैं। वह सही समय था और ओस भी नहीं थी। टी टाइम के बाद ओस गिरनी शुरू हुई।’’

पुजारा ने बताया, ‘‘दिन की शुरुआत में और बिल्‍कुल अंतिम समय में बल्‍लेबाजी थोड़ी आसान थी। एक बार ओस गिरने लगी तो यह फिर आसान हो गया। बल्लेबाजी करने के लिये शुरू में कुछ घंटे और शायद अंतिम घंटे आसान थे।’’

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कूकाबूरा और एसजी पिंक गेंद में अंतर

चेतेश्‍वर पुजारा ने कूकाबूरा (दलीप ट्राफी) और एसजी पिंक गेंद के बीच अंतर बताया। वो दोनों गेंदों के विपरीत बल्‍लेबाजी कर चुके हैं। उन्‍होंने कहा, ‘‘गेंद तेजी से बल्ले पर आ रही है जैसे कूकाबूरा की गेंद आती है, लेकिन एसजी गेंद ज्यादा स्विंग होती है और कूकाबूरा से स्पिनरों को कोई मदद नहीं मिलती लेकिन यहां देखा कि अश्विन और ताईजुल गेंद को स्पिन कर पा रहे थे। स्पिनरों को थोड़ी मदद मिल रही थी लेकिन यह इतनी नहीं थी जितनी लाल गेंद से मिलती थी।’’