क्रिकेट में न्‍यूट्रल अंपायर्स की वापसी चाहते हैं Sunil Gavaskar, कोरोना के चलते बदला गया है नियम

मौजूदा वक्‍त में जिस देश में मैच हो रहा है उसी देश के अंपायर मैदान में नजर आते हैं।

Edited By : Cricket Country Staff |Aug 14, 2021, 10:14 PM IST

Published On Aug 14, 2021, 10:14 PM IST

Last UpdatedAug 14, 2021, 10:14 PM IST

Sunil Gavaskar @ Twitter

Sunil Gavaskar @ Twitter

पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) ने भारत और इंग्लैंड के बीच चल रही टेस्ट श्रृंखला में अंपायरिंग (इंग्लैंड के अंपायरों द्वारा) के स्तर की तारीफ की लेकिन कहा कि वह न्‍यूट्रल अंपायरों को देखना पसंद करेंगे।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने 1994 में टेस्ट मैचों में एक न्‍यूट्रल अंपायर जबकि 2002 में दोनों मैदानी अंपायरों का न्‍यूट्रल होना अनिवार्य कर दिया था।

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कोविड-19 महामारी के दौरान यात्रा प्रतिबंधों को देखते हुए आईसीसी ने अस्थायी रूप से विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के सभी मैचों में घरेलू अंपायरों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी।

भारत के इस पूर्व कप्तान ने दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन के खेल के दौरान कमेंट्री के दौरान कहा, ‘‘ मैं अब भी न्‍यूट्रल अंपायरों को देखना चाहूंगा क्योंकि जब आप दो-तीन समीक्षाओं (डीआरएस) को गंवा देते है तो कोई ऐसा फैसला हो सकता है जिससे मैच का रूख पलट जाये। पक्षपात के आरोप से बचने के लिए आपके पास न्‍यूट्रल अंपायर होने चाहिए।’’

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गावस्कर (Sunil Gavaskar) ने कहा कि वह मौजूदा श्रृंखला और इससे पहले ऑस्ट्रेलिया तथा भारत में हुई श्रृंखलाओं में घरेलू अंपायरों द्वारा लिए गए फैसलों से खुश हैं। ‘‘इस श्रृंखला (भारत और इंग्लैंड के बीच) और ऑस्ट्रेलिया में अंपायरिंग की गुणवत्ता शानदार रही है। हालांकि हमारे (खेल) दिनों के बारे में मैं इसके बारे ज्यादा बात नहीं कर सकता।’’

माइकल गॉफ और रिचर्ड इलिंगवर्थ दूसरे टेस्ट में दो मैदानी अंपायर हैं जबकि रिचर्ड केटलबोरो और क्रिस ब्रॉड क्रमशः तीसरे अंपायर और मैच रेफरी हैं।

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