अहमदाबाद में खेले गए पिंक बॉल टेस्ट (Pink Ball Test) में खेल से ज्यादा चर्चा यहां पिच की हो रही है. कई जानकारों ने ऐसी पिच के स्वभाव पर सवाल उठाए हैं, जिसके चलते कोई टेस्ट मैच दूसरे ही दिन खत्म हो गया. भारत ने यह टेस्ट मैच 10 विकेट से अपने नाम किया, जबकि कोई भी टीम यहां 150 रन भी नहीं बना पाई. इंग्लैंड की टीम अपनी दोनों पारियों में 112 और 81 रन ही जोड़ पाई. भारत की पहली पारी भी यहां 145 के स्कोर पर खत्म हुई. ऐसे में पिच पर सवाल उठना लाजमी हैं. लेकिन टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा (Rohit Sharma) ने कहा कि इस पिच में ‘दिलचस्प’ कुछ भी नहीं था यह बिल्कुल ‘सामान्य’ पिच थी.

रोहित ने इस मैच में भारत की पहली पारी के दौरान शानदार अर्धशतक जमाया था. पहली पारी में वह 66 रन बनाकर आउट हुए थे. उन्होंने इसका श्रेय अपने पॉजिटिव एटीट्यूड (सकारात्मक रवैया) को दिया. रोहित ने कहा कि उन्होंने इस पिच पर सिर्फ टिकने की कोशिश नहीं की बल्कि रन बनाने के प्रयास भी किए.

इस अनुभवी बल्लेबाज ने भारत के लिए एकमात्र फिफ्टी जड़ी थी, जबकि भारतीय स्पिन गेंदबाजों ने यहां मेहमान टीम के 20 में से 19 विकेट अपने नाम किए. इंग्लैंड के बल्लेबाजों को अक्षर पटेल (Axar Patel) की सीधी गेंदों ने चकमा दिया, जो टर्न लेने के बजाए सीधे ‘स्किड’ कर रही थीं.

रोहित ने मैच के समाप्त होने के बाद वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘जब आप ऐसी पिच पर खेलते हो तो आपके अंदर जज्बा होना चाहिए और साथ ही आपको रन बनाने की कोशिश भी करनी चाहिए. आप सिर्फ ब्लॉक नहीं कर सकते. जैसा कि आपने देखा कि कोई कोई गेंद टर्न भी ले रही थी और जब आप टर्न के लिए खेलते तो कोई गेंद स्टंप की ओर ‘स्किड’ (फिसल) भी कर रही थी.’

रोहित को लगता है कि 66 रन की पारी के दौरान वह इंग्लैंड के गेंदबाजों से दो कदम आगे थे. उन्होंने कहा, ‘आपको कभी कभार थोड़ा आगे रहकर रन बनाने के तरीके ढूढने की कोशिश करने की जरूरत होती है. मेरी इच्छा सिर्फ टिकने की नहीं थी बल्कि रन बनाने की कोशिश करने की भी थी, जिसमें अच्छी गेंदों को सम्मान करना भी शामिल था. बस मैंने इतना ही करने की कोशिश की.’