लंबे समय से खराब फॉर्म से जूझ रहे भारतीय स्टार बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) इसे लेकर चिंतित नहीं हैं. उन्होंने कहा कि मेरा काम यही है कि मैं टीम के बारे में सोचूं और टीम को ज्यादा से ज्यादा योगदान दे सकूं. लेकिन योगदान देने का मतलब सिर्फ शतक जमाना ही नहीं है. रहाणे लंबे समय से खराब फॉर्म में हैं अक्टूबर 2019 के बाद से उन्होंने सिर्फ एक ही टेस्ट शतक जमाया है. बीते 15 टेस्ट में उनका औसत 25 से भी नीचे रहा है.

रहाणे गुरुवार से कानपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरू हो रही दो टेस्ट की सीरीज के पहले टेस्ट में कप्तानी करेंगे. इस मैच से पहले जब वह मीडिया से बात करने आए तो उनकी फॉर्म पर सवाल पूछा गया.

इस मौके पर उन्होंने साफ कहा, ‘मुझे अपने फॉर्म की कतई चिंता नहीं है. मेरा काम यही है कि मैं यह सोचूं कि टीम में कैसे योगदान दे सकूं और योगदान का यह मतलब नहीं है कि आपको हर मैच में शतक बनाना है. गंभीर स्थिति में 30-40 रन और 50-60 रन भी बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है.’

उन्होंने कहा, ‘मैं हमेशा टीम के बारे में सोचता हूं अपने बारे में इस तरह नहीं सोचता हूं कि मेरे लिए आगे क्या होगा और भविष्य में क्या होगा? मैं सोचता हूं कि मैं बहुत ही भाग्यशाली हूं अपने देश की टीम का नेतृत्व करना मेरे लिए सम्मान की बात है.’

33 वर्षीय इस खिलाड़ी ने कहा, ‘मैं भविष्य को लेकर चिंतित नहीं हूं कि क्या होगा या भविष्य में क्या होगा. मेरा फोकस यही होता है कि इस क्षण में मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकूं और यही मैं यहां करने की कोशिश करूंगा.’

रहाणे ने बताया कि जब वह टीम की कप्तानी करते हैं तो वह दो रोल निभाते हैं. एक बतौर कप्तान और दूसरा बतौर बल्लेबाज. यह पूछे जाने पर कि वह इन दोनों भूमिकाओं में खुद को अलग कैसे करते हैं तो उन्होंने कहा कि जब वह बल्लेबाजी पर होते हैं तब वह यह नहीं सोचते हैं कि वह कप्तान हैं. क्रीज पर वह बतौर बल्लेबाज सोचकर अपनी पारी खेलते हैं.