टीम इंडिया  © IANS
टीम इंडिया © IANS

रविवार को एंटीगुआ में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए चौथे वनडे मैच में टीम इंडिया की हार की कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। पांच मैचों की सीरीज में 2-0 से आगे चल रही टीम इंडिया की बल्लेबाजी इस मैच में पूरी तरह बिखर गई। अजिंक्य रहाणे और महेंद्र सिंह धोनी को छोड़ किसी भी खिलाड़ी ने अच्छी बल्लेबाजी नहीं की। विराट कोहली, शिखर धवन, दिनेश कार्तिक जैसे खिलाड़ी दहाई आंकड़े तक भी नहीं पहुंच सके। जिसकी बदौलत भारत को 11 रनों से हार का सामना करना पड़ा। 190 या उससे कम स्कोर का पीछा करते हुए 19 साल में भारत की ये दूसरी हार है। इससे पहले भारत 1998 में श्रीलंका के खिलाफ 172 रनों का पीछा करते हुए 8 रन से हारा था।

इसके साथ ही वेस्टइंडीज टीम ने भी अपना 18 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दरअसल इस मैच से पहले भारत के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज का सबसे कम स्कोर 191 का था, जिसे वह बचा पाए थे। साल 1998 में कनाडा के टोरोंटो में खेले गए उस मैच में वेस्टइंडीज टीम ने 191 के लक्ष्य को बचाते हुए टीम इंडिया को केवल 120 रन पर ऑल आउट कर दिया था। उस मैच में टीम इंडिया के कप्तान सौरव गांगुली थे लेकिन वह भी भारत को नहीं जिता सके। [ये भी पढ़ें: वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच में महेंद्र सिंह धोनी ने बनाए ये अनोखे रिकॉर्ड]

भारत की इस हार की पीछे का एक कारण कप्तान कोहली भी हैं। अगर टीम इंडिया के पिछले उन दो वनडे मैचों को देखें जहां भारत को रनों का पीछा करते हुए हार मिली है तो ये बात साफ हो जाएगी। भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ चौथा वनडे हारने से पहले पाकिस्तान के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल मैच भी रनों का पीछा करते हुए हारा था। इन दोनों ही मैचों में कोहली पांच रन के अंदर आउट हो गए थे। शायद अब विपक्षी टीमों को पता चल गया है कि अगर भारत के खिलाफ लक्ष्य बचाना है तो उनके चेजिंग मास्टर यानि कि कोहली को आउट करना जरूरी है।