महेंद्र सिंह धोनी © IANS
महेंद्र सिंह धोनी © IANS

दुनिया के सबसे बड़े फिनिशर महेंद्र सिंह धोनी ने अपने करियर में कई धमाकेदार पारियां खेली हैं लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ चौथे वनडे में धोनी अपनी टीम को जिताने में नाकाम रहे। धोनी ने एक छोर से पारी संभालते हुए 114 गेंदो पर 54 रन बनाए लेकिन 49वें ओवर में उनके आउट होते ही टीम इंडिया की जीत की उम्मीद टूट गई। हालांकि इस दौरान धोनी ने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो पिछले 16 सालों में नहीं बना था। धोनी ने वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच में 108 गेंदो पर 50 रन बनाए जो कि भारतीय क्रिकेट इतिहास का दूसरा सबसे धीमा शतक है।

धोनी से पहले 1999 में टीम इंडिया के सदगोप्पन रमेश ने केन्या के खिलाफ वनडे मैच में 117 गेंदो में 50 रन बनाए थे। किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा बनाए सबसे धीमे अर्धशतक का रिकॉर्ड आज भी उन्हीं के नाम है। इसके अलावा टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का नाम भी इस सूची में शामिल है। गांगुली ने 2005 में श्रीलंका के खिलाफ 105 गेंदो में अर्धशतक लगाया था, ये उनके करियर का सबसे धीमा अर्धशतक है। [ये भी पढ़ें: चौथे वनडे में वेस्टइंडीज ने भारत को 11 रनों से हरा सीरीज में वापसी की]

100 गेंदो के बाद भी कोई बाउंड्री नहीं: इस मैच के दौरान धोनी ने भारत का दूसरा सबसे धीमा अर्धशतक लगाने के अलावा और भी कई रिकॉर्ड बनाए हैं। धोनी ने 114 गेंदो पर 54 रनों की अपनी इस पारी के दौरान 100 से ज्यादा गेंद खेलने के बाद भी कोई बाउंड्री ना लगाने का रिकॉर्ड भी बना लिया है। 47.37 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए धोनी ने इस पारी में केवल एक चौका लगाया। हालांकि एंटीगुआ की इस मुश्किल पिच पर धोनी ने काफी सूझ-बूझ से बल्लेबाजी की जिसकी बदौलत वह टीम को जीत के काफी करीब भी ले आए थे।

25 से ज्यादा रन बनाने पर सबसे धीमी वनडे पारी: ये धोनी की 149वीं वनडे पारी थी जिसमें उन्होंने 25 से ज्यादा रन बनाए हैं। अगर उनकी पिछली पारियों से तुलना करें तो ये धोनी की सबसे धीमी पारी थी। पहली बार 25 से ज्यादा रन बनाने के बाद धोनी का स्ट्राइक रेट 50 से नीचे गया है। इससे पहले साल 2010 में न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्होंने 50.66 की औसत से 75 गेंदो में 38 रन बनाए थे। [ये भी पढ़ें:टीम इंडिया ने पाकिस्तान को दी मात साथ ही मिताली राज ने बना डाला बड़ा रिकॉर्ड]

इस मैच में धोनी अपने स्वाभाविक खेल को छोड़ पिच और स्थिति के अनुरूप खेलते नजर आए लेकिन उनकी ये मेहनत भी टीम इंडिया को जीत ना दिला सकी।