यो-यो टेस्ट के बाद टीम इंडिया को मिला डीएनए टेस्ट

बेहतर फिटनेस के लिए बीसीसीआई खिलाड़ियों का फिटनेस टेस्ट करवा रही है।

Edited By : Cricket Country Staff |Nov 12, 2017, 04:46 PM IST

Published On Nov 12, 2017, 04:46 PM IST

Last UpdatedNov 12, 2017, 04:46 PM IST

महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली टीम इंडिया के सबसे फिट खिलाड़ियों में से हैं © AFP

यो-यो टेस्ट के बाद अब टीम इंडिया के खिलाड़ियों को डीएनए टेस्ट से गुजरना पड़ रहा है। बीसीसीआई ने खिलाड़ियों की आनुवंशिक फिटनेस स्थिति के बारे में जानने के लिए इस टेस्ट का आयोजन करवाया है। इस परीक्षण से खिलाड़ी को अपनी रफ्तार को बढ़ाने, मोटापा कम करने, दमखम बढ़ाने और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। गौरतलब है कि बीसीसीआई ने टीम ट्रेनर शंकर बासु की सिफारिश पर इस टेस्ट को शुरू किया है।

बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई से कहा, ‘‘हां, हमने भारतीय क्रिकेट टीम के लिये पिछले कुछ समय से डीएनए टेस्ट शुरू किया है। यह फिटनेस के नए मापदंडों के अनुसार किया जा रहा है जिन्हें टीम मैनेजमेंट ने तय किया है।शंकर बासु ने यह आइडिया दिया और यह काफी फायदेमंद साबित हुआ है। हर खिलाड़ी के परीक्षण में बीसीसीआई को 25 से 30 हजार रूपये के बीच खर्च करना पड़ रहा है जो कि काफी कम धनराशि है।’’ इससे पहले भारतीय टीम का शरीर में वसा के प्रतिशत का पता करने के लिये स्किनफोल्ड टेस्ट और बाद में डेक्सा टेस्ट होता था।

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क्या है डीएनए टेस्ट:

डीएनए टेस्ट या आनुवंशिक फिटनेस टेस्ट 40 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति की फिटनेस, स्वास्थ्य और पोषण के बारे में पता किया जा सकेगा। इसके बाद एनालिसिस के लिए हर क्रिकेटर के डीएनए आंकड़ों को एक व्यक्ति विशेष के वजन और खानपान जैसे आंकड़ों के साथ मिलाया जाएगा।

अधिकारी ने कहा, ‘‘अब डीएनए टेस्ट किया जा रहा है ताकि एक निश्चित वसा प्रतिशत को बनाए रखने के लिए शरीर की जरूरतों का पता लगाया जा सके।’’ अभी सीनियर राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ी के लिये शरीर में वसा प्रतिशत की दर 23 प्रतिशत है जो कि पाकिस्तान और न्यूजीलैंड सहित अधिकतर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के लिए मानक है। यह पता चला है कि अधिकतर क्रिकेटरों को ये पता ही नहीं है कि कड़े अभ्यास के बाद भी उनके शरीर में वसा का प्रतिशत एक निश्चित स्तर तक कम क्यों नहीं हो पाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब परीक्षण शुरू किये गये तो कुछ खिलाड़ियों को पता चला कि वे लैक्टोज को नहीं पचा पाते हैं, जो दूध में मौजूद होता है या जो खिलाड़ी मटन बिरयानी खाने के शौकीन हैं उन्हें पता चला कि किसी खास प्रकार का भोजन करने के बाद उनका शरीर क्या मांगता है।’’ इस टेस्ट से जिस खिलाड़ी की मजबूती और दमखम में काफी सुधार हुआ वह तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार है जो वनडे और टी20 में लगातार खेल रहा है।

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