रोहित शर्मा  © AFP
रोहित शर्मा © AFP

कई मायनों में आईपीएल 10 रोहित शर्मा के लिए सौगात लेकर आ रहा है क्योंकि वह पूरे पांच महीने में अपनी जांघ की चोट से उबरने के बाद मुंबई इंडियंस की अगुआई करने को तैयार हैं। पिछले दिनों उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान क्रिकेट मैदान में वापसी की थी लेकिन उनके घुटने में परेशानी हो गई और देवधर ट्रॉफी से उन्हें बाहर हो जाना पड़ा। लेकिन अब रोहित पूरी तरह से फिट हैं। रोहित को जांघ में चोट दिसंबर 2016 में न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान लगी थी।

अपनी चोट के बारे में बातचीत करते हुए रोहित ने कहा, “उस मैच में रन दौड़ते वक्त अचानक तेज आवाज आई और मैं बहुत डर गया क्योंकि मेरे साथ इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था। चोट का एमआरआई होने तक तो मैं बहुत डरा हुआ था। मैंने कई डॉक्टर्स और भारतीय टीम के फिजियो पैट्रिक फरहार्ट से बात की और सभी ने कहा कि चोट गंभीर नहीं है। यह एक छोटी चोट है जो लग जाती है। एक स्पोर्ट्सपर्सन होते हुए, तुम्हें मजबूत रहना चाहिए। मैं बाद में आसानी से इसमें ढल गया।”

रोहित ने ये बात स्वीकार की कि जो समय उन्होंने नेशनल क्रिकेट एकेडमी बेंगलुरू में रिहेबिलिएशन के लिए गुजारा वह कठिन था क्योंकि मैंने टीम इंडिया की अंतिम एकादश में अपनी जगह पक्की करना शुरू कर दी थी। रोहित 13 घरेलू टेस्ट मैचों में से सिर्फ तीन में ही खेल पाए। रोहित ने न्यूजीलैंड के खिलाफ कोलकाता की तेज गेंदबाजी को सहारा देने वाली पिच पर अच्छी बल्लेबाजी की थी। इसके बाद वनडे सीरीज के दौरान वह चोटिल हो गए और पूरे सीजन के लिए बाहर हो गए। [ये भी पढ़ें: आईपीएल: मुंबई, बेंगलुरू में होंगे क्वालीफायर, एलिमिनेटर मैच]

रोहित कहते हैं, “होटल रूम में बैठकर टीम को खेलते देखना कठिन था। यह हमेशा कठिन होता है। पर मुझे लगता है कि आपको इससे गुजरना पड़ता है। मैं इससे पहले भी कई बार गुजर चुका हूं। जब आपको पता होता है कि आप चोटिल हो, रिहेब वगैरह करना। तो उस पोजीशन में होना और टीम को खेलते देखना कठिन मालूम पड़ता है। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज थी कि मैं न ही निराश हाऊं और न ही गैर जरूरी और बेमतलब की चीजें करूं। इसीलिए मैं पूरी तरह से अपने रीहैब में ध्यान केंद्रित किए हुए था और मैं चाहता हूं कि ये चीजें भविष्य में मेरे साथ न हों।”

एक चुनौती जो रोहित ने बताई वो थी अपनी खोई हुई ताकत को वापस पाना, उन्होंने कहा, “इतना अच्छा प्रयास करने का श्रेय एनसीए स्टाफ को जाता है। जब आप ज्यादा चोटिल होते हो तो आपकी मसल काफी कम हो जाती हैं और इसकी वजह से आप कमजोर हो जाते हो। इसीलिए मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी इस ताकत को वापस पाना और ज्यादा मजबूत बनना। वहां, कई चीजें थीं जिनपर मुझे ध्यान केंद्रित करना था। अच्छी बात है कि मैं अपने पैरों पर वापस लौट चुका हूं और खेलने के लिए तैयार हूं।”