Ishant Sharma: Jason Gillespie gave me the solution to increase my pace
कप्तान विराट कोहली के साथ इशांत शर्मा (IANS)

भारत में मुफ्त की सलाह देने वालों की कमी नहीं है, खासकर कि जब बात क्रिकेट की हो। हर शख्स के पास इस बात का जवाब रहता है कि किस मैच में कौन से खिलाड़ी ने क्या गलती की। भारतीय तेज गेंदबाज इशांत शर्मा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जब वो अपने करियर के खराब दौर से गुजर रहे थे तब हर किसी ने उन्हें ये उनकी गलतियों और परेशानियों के बारे में बताया लेकिन उसका हल इशांत को पूर्व तेज गेंदबाज जेसन गिलेस्पी ने दिया।

हैदराबाद के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मुकाबले के बाद इशांत ने कहा, ‘‘भारत में दिक्कत ये है कि हर कोई आपको समस्या के बारे में बता देगा लेकिन कोई भी आपको हल नहीं बताएगा। अब हल जानना सबसे अहम पहलू है। मैंने महसूस किया कि शायद एक या दो लोगों ने ही हल ढूंढने पर काम किया। समस्या के बारे में हर कोई आपको बता देगा लेकिन जो अच्छा कोच है, वो आपको हल के बारे में भी बता देगा।’’

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तो आखिर इशांत की समस्या क्या थी? ससेक्स में गिलेस्पी की कोचिंग में खेलने वाले इशांत ने कहा, ‘‘कई लोगों ने मुझे कहा कि मुझे अपनी फुल लेंथ गेंदों की गति बढ़ाने की जरूरत है। लेकिन किसी ने भी ये नहीं बताया कि क्या किया जाए? लेकिन जब मैं काउंटी क्रिकेट खेलने गया तो जेसन गिलेस्पी ने मुझे हल बताया। गिलेस्पी ने मुझे कहा कि फुल लैंग्थ गेंदों में रफ्तार बढ़ाने के अलावा आपको गेंद बस छोड़नी नहीं है, बल्कि निशाने पर हिट करनी है कि यह घुटने तक पहुंचनी चाहिए।’’

धोनी और विराट की कप्तानी में क्या अंतर है

महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी और विराट कोहली की कप्तानी के दौरान टेस्ट टीम में आए बदलाव पर उन्होंने कहा, ‘‘देखिए धोनी के समय में हममें से कुछ के पास उतना अनुभव नहीं था। साथ ही तेज गेंदबाजों को काफी रोटेट किया जाता था, यही कारण है कि एक ग्रुप के रूप में निरंतरता हासिल नहीं की जा सकी। अगर आप जानते हो कि आपका तीन-चार तेज गेंदबाजों (अब जसप्रीत बुमराह के साथ) का पूल है तो इससे संवाद बढ़ जाता है। पहले छह से सात गेंदबाज होते थे तो इतनी बातचीत नहीं होती थी। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन विराट के आने के बाद हमें काफी अनुभव मिला है और इससे मदद मिली है। अब जब आप ज्यादा खेलते हो, ड्रेसिंग रूम में ज्यादा रहते हो, परिवार की तुलना में टीम के साथ ज्यादा समय बिताते हो तो चर्चाएं भी खुली होती हैं। आप जब क्रीज पर जाते तो आप ज्यादा लुत्फ उठाना शुरू कर देते हो। ये अलग अहसास है।’’