कोविड-19 महामारी के बाद जब क्रिकेट की वापसी होगी तो क्या गेंदबाज टेस्ट मैच में गेंद की चमक को बरकरार रखने और रिवर्स स्विंग प्राप्त करने के लिए उसपर लार का इस्तेमाल कर सकेंगे. इस सवाल का जवाब हर कोई जानना चाहता है. लेकिन इन सबके बावजूद भारतीय तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट का कहना है कि सीमित ओवरों के गेम में इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा.

उनादकट ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘मुझे लगता है कि सफेद गेंद के क्रिकेट को समस्या नहीं होगी. यहां तक कि वनडे में आप 25-25 ओवर के लिए दो नई गेंद लेते हो. सफेद गेंद के क्रिकेट में ‘रिवर्स स्विंग’ कभी भी अहम नहीं रही है. यहां तक कि जहां तक सफेद गेंद का संबंध है तो नई गेंद के लिए आपको पसीने या लार की जरूरत नहीं पड़ती.’

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रणजी ट्रॉफी विजेता सौराष्ट्र के कप्तान ने कहा कि इसके पीछे कारण यह है कि सफेद रंग की गेंद पर स्विंग के लिए बहुत कम या बिल्कुल पसीने या लार की जरूरत नहीं पड़ती.

बकौल उनादकट, ‘सफेद गेंद को अगर आप अपनी पैंट पर रगड़ोगे तो भी यह चमकदार बनी रहेगी जबकि लाल गेंद को चमकाने के लिए लार और पसीने की ज्यादा जरूरत होती है.’ इसलिए उन्हें लगता है कि सीमित ओवर के क्रिकेट में गेंदबाजों के लिए कम जोखिम होगा और इन्हें टेस्ट और प्रथम श्रेणी मैचों से पहले शुरू किया जा सकता है.

लिमिटेड ओवर के क्रिकेट पर दिया जोर 

उन्होंने कहा, ‘अगर हम सफेद गेंद के मुकाबले शुरू करते हैं तो हमारे लिए निश्चित रूप से फायदा होगा क्योंकि लार और पसीना लाल गेंद के क्रिकेट के लिए ही अहम होते हैं.’

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गौरतलब है कि कोरोनावायरस के कारण इस समय क्रिकेट की सभी गतिविधियां ठप्प हैं. कोरोना के कारण आईपीएल के 13वें एडिशन को भी अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया.

भारत के लिए 7 वनडे और 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले उनादकट इंडियन प्रीमियर लीग (आईपील) में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हैं.