Kapil Dev’s big advice for Sachin’s son Arjun Tendulkar
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अर्जुन तेंदुलकर को मुंबई इंडियंस की ओर से IPL 2022 में एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। मुंबई ने IPL 2022 के मेगा ऑक्शन में अर्जुन तेंदुलकर को 30 लाख रुपये में खरीदा था लेकिन पूरे टूर्नामेंट टीम ने उन्हें बेंच पर बिठाए रखा। मुंबई ने 15वें सीजन में ऋतिक शौकीन से लेकर कुमार कार्तिकेय जैसे युवाओ को मौका दिया लेकिन अर्जुन का नंबर नहीं आ सका। MI के गेंदबाजी कोच शेन बॉन्ड ने इस सीजन अर्जुन को एक मैच भी नहीं मिलने पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि 22 वर्षीय युवा खिलाड़ी को अभी भी अपने स्किल को सुधारने की जरूरत है।

इस विषय पर चर्चा करते हुए भारत के पूर्व कप्तान, महान कपिल देव ने भी कहा कि अर्जुन अपने सरनेम के कारण हमेशा थोड़ा अतिरिक्त दबाव महसूस करते हैं। महान सचिन तेंदुलकर द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करना किसी भी आधुनिक बल्लेबाज के लिए आसान नहीं है, उनके बेटे की तो बात ही छोड़ दीजिए। कपिल को लगता है कि अर्जुन की तुलना उनके पिता से नहीं की जानी चाहिए और उनकी उम्र को देखते हुए युवा को खेलने देना चाहिए और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उसे अपने खेल का आनंद लेना चाहिए।

कपिल ने अनकट पर कहा, “सब उसके बारे में क्यों बात कर रहे हैं? क्योंकि वह सचिन तेंदुलकर के बेटे हैं। उसे क्रिकेट खेलने दें और उसकी तुलना सचिन से न करें। तेंदुलकर का नाम रखने के फायदे भी हैं और नुकसान भी। डॉन ब्रैडमैन के बेटे ने अपना नाम बदल लिया क्योंकि वह उस तरह के दबाव को नहीं झेल सके। उन्होंने ब्रैडमैन सरनेम हटा दिया क्योंकि सभी को उम्मीद थी कि वह अपने पिता की तरह निकलेंगे।”

अर्जुन पिछले 2 सीजन से MI टीम के साथ है, लेकिन अभी तक अपना IPL डेब्यू नहीं कर सके हैं। अर्जुन ने T20 मुंबई लीग में भी केवल दो T20 मैच खेले हैं। हालांकि उन्हें अक्सर भारतीय क्रिकेट टीम के लिए एक नेट गेंदबाज के रूप में इस्तेमाल किया जाता है और उन्होंने विराट कोहली, रोहित शर्मा, यहां तक कि एमएस धोनी जैसे बड़े सितारों के खिलाफ नेट में गेंदबाजी की है। कपिल को लगता है कि अर्जुन को उम्मीदों का दबाव नहीं उठाना चाहिए और उन्होंने कहा कि अगर वह अपने पिता के आधे खिलाड़ी बन सके, तो वह अपने लिए अच्छा कर पाएंगे।”

कपिल ने आगे कहा, “अर्जुन पर दबाव न डालें। वह एक युवा लड़का है। जब उनके पिता ही महान सचिन तेंदुलकर हैं तो हम उनसे कुछ भी कहने वाले कौन होते हैं? लेकिन मैं अभी भी उसे एक बात बताना चाहूंगा… जाओ और आनंद लो। कुछ भी साबित करने की जरूरत नहीं है। अगर आप अपने पिता के 50 प्रतिशत भी बन सके तो इससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता। जब तेंदुलकर का नाम आता है, तो हमारी उम्मीदें बढ़ जाती हैं क्योंकि सचिन इतने महान थे।”