केदार जाधव  © IANS
केदार जाधव © IANS

हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में शतक जड़ने के बाद मैन ऑफ द सीरीज से नवाजे गए केदार जाधव रातों- रात सेलिब्रिटी बन गए हैं। हालांकि, जाधव ने अपना अंतरराष्ट्रीय टी20 डेब्यू तो साल 2014 में किया था। लेकिन इस दौरान उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली थी। साल 2016 के उत्तरार्ध में उनकी टीम इंडिया में वापसी न्यूजीलैंड वनडे सीरीज के साथ हुई थी। जिसमें उन्होंने उठा- उठाकर स्ट्रोक खेले थे। उनकी प्रतिभा को तभी चयनकर्ताओं ने पहचान लिया था और जब इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए टीम इंडिया की घोषणा की गई तो उसमें जाधव का नाम सम्मिलित था। तीन मैचों की वनडे सीरीज में तो उन्होंने कमाल ही कर दिया और 77.33 की औसत से 232 रन बना डाले। उन्होंने 351 रनों के चेज में जहां बेहतरीन शतक जमाया तो अपने छक्के जड़ने अंदाज से उन्होंने कोहली के शतक को लोगों के जेहन में धुंधला कर दिया। अंतिम मैच में जाधव की 90 रनों की पारी ने बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए टीम इंडिया की उम्मीदें अंतिम ओवर तक जिंदा रखीं।

बहरहाल, उनके आउट होने के बाद टीम इंडिया को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन इसके बावजूद महाराष्ट्र के कप्तान की साख बढ़ गई। उन्होंने सीरीज में रन 144 के भारी भरकम स्ट्राइक रेट के साथ बनाए। ये विडंबना ही है कि वह वर्तमान टी20 सीरीज में टीम इंडिया का हिस्सा नहीं हैं। वर्तमान में जाधव क्रिकेट से दूर अपना शांत समय बिता रहे हैं। हाल फिलहाल में हीरो बनने से उन्हें थोड़ी बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि जब भी वह कहीं घूमने को निकलते हैं तो पहचान लिए जाते हैं और भीड़ द्वारा घेर लिए जाते हैं। अब इन परेशानियों से बचने का उन्होंने हल भी निकाल लिया है और एक असिस्टेंट समेत बाउंसर को नौकरी पर रख लिया है। मिड- डे में छपी रिपोर्ट के मुताबिक जाधव अब असिस्टेंट और बाउंसर को साथ लेकर घूमते हैं। जहां भी वह जाते हैं, चाहे वह उनका पुणे में स्थिति पसंदीदा रेस्त्रां वैशाली ही क्यों न हो। उनके भीतर जाने से पहले बाउंसर अंदर जाकर माहौल जांचता है उसके बाद ही वह उस स्थान पर जाते हैं। ये भी पढ़ें: महेंद्र सिंह धोनी ने मोबाइल कंपनी पर नाम के दुरूपयोग का आरोप लगाया

जाधव के लिए जिंदगी एकदम से बदल गई है। भले ही वह वर्तमान में टी20I स्क्वाड का भाग नहीं है। लेकिन उनकी फॉर्म को देखते हुए वह जाहिर तौर पर चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम की अंतिम एकादश के अंग होंगे।