इंडियन प्रीमियर लीग © AFP
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साल 2011 आईपीएल के बाद कोच्चि टस्कर्स को आईपीएल खेलने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। तबसे ही बीसीसीआई और कोच्चि टस्कर्स के बीच विवाद चल रहा है। कोच्चि टीम को समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने के कारण प्रतिबंधित किया गया था। ऐसे में बीसीसीआई ने कोच्चि टीम को आईपीएल में भविष्य में कभी न खेलने के लिए 153 करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई देने को कहा था। बाद में एक मध्यस्थता पैनल बिठाया गया और उसने कोच्चि टीम के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीसीसीआई को 550 करोड़ रुपए बतौर नुकसान भरपाई देने को कहा।

हालांकि, बीसीसीआई लगातार भुगतान देने में देरी करता रहा, जिसके कारण लगातार ब्याज बढ़ता गया और 18 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज (कंपाउंड इंटरेस्ट) की दर से अब यह रकम 1200 करोड़ रुपए से ऊपर हो गई है। इस मुद्दे को न ही बोर्ड के कार्यकारी सचिव अमिताभ चौधरी और न ही सीईओ राहुल जौहरी सुलझा पाए हैं। हर दिन के साथ बीसीसीआई पर 75 लाख रुपए चढ़ रहे हैं।

जब शशांक मनोहर बीसीसीआई के अध्यक्ष थे तब कोच्चि टस्कर्स के अनुबंध को साल 2011 में उनकी बैंक गारंटी की अस्वीकृति के कारण प्रतिबंधित कर दिया गया था। अब लंबे इंतजार के बाद टीम के मालिकों ने बीसीसीआई को उनकी टीम को अगले आईपीएल सीजन में बरकरार रखने के लिए कहा है। एक वरिष्ठ बीसीसीआई अधिकारी ने डीएनए को कहा, “यह हमारे लिए काफी कठिन परिस्थिति थी। हमारे पूर्व प्रेसीडेंट ने हमें ऐसी परिस्थिति में लाकर खड़ा कर दिया था कि हमारे पास एक ही रास्ता बचा था कि हम फ्रेंचाइजी की बात को मान लें। वैसे बाहर के लोगों को इस संबंध में नहीं पता कि बोर्ड में निर्णय आखिर कौन ले रहा है। यह ऐसा मामला नहीं है जिसका हर दिन होने वाली चीजों से संबंध है बल्कि यह तो पॉलिसी की बात है।” [ये भी पढ़ें: टीम इंडिया से करुण नायर की हो सकती है छुट्टी?]

कोच्चि टस्कर्स के मालिकों ने इस मामले को लेकर अपनी बात स्पष्ट रूप से रखी है कि अगर उन्हें आईपीएल के 11वें संस्करण में खेलने की इजाजत दी जाती हैं तो जो उनका पैसा बीसीसीआई के पास है उसका बहुत थोड़ा भाग ही मांगेंगे। कोच्चि के मालिक ने बुधवार को कहा, “हमने लिखित रूप से बीसीसीआई को कहा है कि हम सिर्फ आईपीएल खेलना चाहते हैं। जिसके लिए हम पैसे का एक बड़ा हिस्सा छोड़ने को तैयार हैं। हमें थोड़ा भुगतान कर दें और हमें आईपीएल खेलने दें यही एक विकल्प है जिस पर हम कार्य कर रहे हैं।”