Krishi Vigyan Kendra Writes to BCCI for Kadaknath Chicken for Team India
Team-india © AFP

मध्यप्रदेश के झाबुआ स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ने विराट कोहली की अगुवाई वाली भारतीय क्रिकेट टीम को सलाह दी है कि वह पोषण की जरूरतें पूरी करने के लिये अपने आहार में मशहूर कड़कनाथ चिकन को शामिल करे।

इस ‘पौष्टिक’ मशविरे को गुरुवार को बल मिला, जब मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा कि टीम इंडिया को केवीके की बात पर विचार करना चाहिए।

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यादव ने संवाददाताओं से कहा, ‘कड़कनाथ चिकन को लेकर केवीके की बात सुनी जानी चाहिए। अगर भारतीय क्रिकेट टीम को कड़कनाथ चिकन से पोषण संबंधी फायदा हो सकता है, तो केवीके के सुझाव पर विचार करने में किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।’

उन्होंने कहा कि कड़कनाथ चिकन को बढ़ावा दिए जाने से झाबुआ में इस पारंपरिक प्रजाति के मुर्गे पालने वाले लोगों को भी फायदा होगा।

केवीके की ओर से दो जनवरी को पत्र लिखकर कोहली के साथ बीसीसीआई को सलाह दी गई है कि भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के आहार में कड़कनाथ चिकन शामिल किया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल इस पत्र में कड़कनाथ चिकन की खूबियां गिनाते हुए कहा गया है कि इसमें दूसरी मुर्गा प्रजातियों के मांस के मुकाबले चर्बी और कोलेस्ट्रॉल काफी कम होता है, जबकि प्रोटीन और आयरन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है।

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देश की जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री ने ‘मांस उत्पाद तथा पोल्ट्री एवं पोल्ट्री मीट’ की श्रेणी में गत 30 जुलाई को कड़कनाथ चिकन के नाम भौगोलिक पहचान (जीआई) का चिन्ह पंजीकृत किया था।

झाबुआ मूल के कड़कनाथ मुर्गे को स्थानीय जुबान में ‘कालामासी’ कहा जाता है। इसकी त्वचा और पंखों से लेकर मांस तक का रंग काला होता है।

जानकारों के मुताबिक कड़कनाथ चिकन की मांग इसलिये भी बढ़ती जा रही है, क्योंकि इसमें अलग स्वाद के साथ औषधीय गुण भी होते हैं। इन वजहों से कड़कनाथ प्रजाति के जीवित पक्षी, इसके अंडे और इसका मांस दूसरी कुक्कुट प्रजातियों के मुकाबले काफी महंगी दरों पर बिकता है।

(इनपुट-भाषा)