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VIDEO: टीम इंडिया पर शर्म आती है... सूर्य कुमार यादव और जय शाह पर क्यों भड़के कीर्ति आजाद ?

कीर्ति आजाद ने कहा, 1983 में जब हम जीते थे, तब भी सभी धर्म के लोग थे, खिलाड़ी और खेल का कोई मजहब नहीं होता, वो अपनी टीम का होता है.

user-circle cricketcountry.com Written by Akhilesh Tripathi
Last Updated on - March 10, 2026 1:55 PM IST

Kriti Azad Slams Surya Kumar Yadav: भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर टी20 विश्व कप 2026 का खिताब अपने नाम किया है. खिताब जीतने के बाद टीम इंडिया का सेलिब्रेशन जारी है. जीत के बाद टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव, जय शाह और गौतम गंभीर वर्ल्ड कप ट्रॉफी को लेकर हनुमान मंदिर गए, जिसे लेकर टीएमसी सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद भड़क गए हैं. कीर्ति आजाद ने पहले सोशल मीडिया के जरिए ट्रॉफी लेकर मंदिर में जाने पर आपत्ति जताई और अब कहा कि हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए जो हुआ वह सही नहीं था.

टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि आप टीम के लिए खेलते हैं, देश में सभी धर्म के लोग रहते हैं, सभी उस टीम का हिस्सा हैं, 1983 में जब हम जीते थे, तब भी सभी धर्म के लोग थे, खिलाड़ी और खेल का कोई मजहब नहीं होता, वो अपनी टीम का होता है. उन्होंने कहा कि इन लोगों ने हमारा सिर गर्व से ऊंचा किया है, उन्होंने संजू सैमसन और मोहम्मद सिराज की तारीफ करते हुए कहा कि यह भारत हिंदुस्तान की टीम है.

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खेल को धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए: आजाद

उन्होंने ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर कहा कि फिर भारत और पाकिस्तान में क्या अंतर रह गया. उन्होंने कहा कि मैं खुद हिन्दू हूं, लेकिन खेलते वक्त कभी धर्म को नहीं जोड़ा. आर्ट का कोई धर्म नहीं होता, इसलिए मैंने इसका विरोध किया, हर मैच से पहले और बाद में मैं भी मंदिर जाता था. उन्होंने कहा, हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए जो हुआ वह सही नहीं था.

एक्स पर लिखा, टीम इंडिया पर शर्म आती है

बता दें कि कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर ट्रॉफी को मंदिर में ले जाने पर तीखी आलोचना की थी. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि टीम इंडिया पर शर्म आती है. उन्होंने लिखा कि जब हमने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था, तब हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के खिलाड़ी थे, हम ट्रॉफी को अपनी धार्मिक जन्मभूमि, अपनी मातृभूमि भारत (हिंदुस्तान) में लाए थे, आखिर भारतीय क्रिकेट ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है? मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं ?

उन्होंने आगे लिखा कि यह टीम भारत का प्रतिनिधित्व करती है, सूर्यकुमार यादव या जय शाह के परिवार का नहीं! सिराज कभी ट्रॉफी को मस्जिद में नहीं ले गए, संजू कभी इसे चर्च में नहीं ले गए, संजू ने टूर्नामेंट में अहम भूमिका निभाई थी और उन्हें मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था. यह ट्रॉफी हर धर्म के भारतीयों की है, यह किसी एक धर्म की जीत नहीं है.

सबकी अपनी-अपनी आस्था, हनुमान मंदिर के पुजारी ने क्या कहा ?

वहीं इस विवाद पर मंदिर के पुजारी ईश्वरदास त्यागी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि संसार में दो प्रकार के लोग होते हैं। एक होते हैं आस्तिक और दूसरे होते हैं नास्तिक, जिनका प्रभु में विश्वास नहीं है, वे लोग तो ऐसी बातें करेंगे ही. जो आस्तिक होते हैं, वो प्रभु से प्रेम करते हैं।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि फाइनल मुकाबले से पहले जय शाह दर्शन करने आए थे, आश्रम और स्टेडियम का एक ही प्रांगण है, जब भी बड़े मुकाबले होते हैं तो कोई न कोई खिलाड़ी दर्शन करने आते हैं. उन्होंने कहा कि इस बार जब फाइनल मुकाबले से पहले जय शाह और खिलाड़ी दर्शन करने आए।,शायद उनके मन में भाव रहा होगा कि अच्छी तरह खेलूं और टीम को जीत दिला सकूं, यही सोच रही होगी इसलिए दर्शन करने आए. पुजारी ने कहा कि फाइनल मैच जीतने के बाद जय शाह, कोच गौतम गंभीर, कप्तान सूर्यकुमार यादव के साथ कुछ और लोग दर्शन करने आए। सभी लोगों का स्वागत किया गया और टीम इंडिया के वर्ल्ड चैंपियन बनने पर खुशी मनाई गई।

उन्होंने कहा कि जब भी यहां मैच होता है तो जिन खिलाड़ियों में श्रद्धा होती है वे यहां प्रार्थना करने आते हैं, दुनिया कुछ न कुछ कहती रहती है, हार जाते तो कहते देखो हनुमान जी से प्रार्थना की और हार गए और जब जीत गए तो कुछ लोगों ने कहा कि देखो हनुमान जी ने मैच जिता दिया, अपनी-अपनी आस्था और सोच की बात है.

T20 वर्ल्ड कप 2026 से जुड़े सभी ताजा अपडेट आप देख सकते हैं: https://www.cricketcountry.com/hi/icc-mens-t20-world-cup-2026/