"टीम इंडिया को खामोश रहने वाले कोच की जरूरत है"

पूर्व भारतीय क्रिकेटर मदन लाल ने अनिल कुंबले का समर्थन किया।

Edited By : Gunjan Tripathi |Jun 21, 2017, 12:31 PM IST

Published On Jun 21, 2017, 12:31 PM IST

Last UpdatedJun 21, 2017, 12:31 PM IST

मदन लाल ने अनिल कुंबले के इस्तीफ देने के फैसला का समर्थन किया © Getty Images
मदन लाल ने अनिल कुंबले के इस्तीफ देने के फैसला का समर्थन किया © Getty Images

टीम इंडिया के मुख्य कोच अनिल कुंबले ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है जिसके बाद बीसीसीआई को नए कोच की तलाश है। ऐसे में पूर्व भारतीय क्रिकेटर मदन लाल ने सभी उम्मीदवारों को एक जरूरी सलाह दी है। उन्होंने बताया कि टीम इंडिया का कोच बनने के लिए खामोश रहना बहुत जरूरी है। मदन लाल ने इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान कहा, “मुझे लगता है कि अनिल कुंबले ने अपने पद से इस्तीफा देकर सही फैसला लिया है क्योंकि अगर ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ी आपका सम्मान नहीं करते तो कोच बने रहने का कोई मतलब नहीं है।”

1983 विश्व कप जीतने वाली टीम इंडिया का हिस्सा रहे मदन लाल ने कटाक्ष करते हुए कहा, “जब कोई कोच अपना पद छोड़ता है तो आने वाले नए उत्तराधिकारी के लिए कई सबक भी छोड़कर जाता है। टीम इंडिया को एक ऐसे कोच की जरूरत है जो चुपचाप अपना काम करता रहे। अगर वीरेंद्र सहवाग और टॉम मूडी खामोश रहकर काम नहीं करेंगे तो उन्हें भी कुंबले जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा। आज तक जिन लोगों ने भी भारतीय टीम की कोचिंग की है उनमें से क्या आपने संजय बांगड़, जॉन राइट या गैरी कर्स्टन की शिकायत सुनी है?” मदन लाल का मानना है कि टीम इंडिया में कोच का पद कप्तान से काफी नीचे है। [ये भी पढ़ें: तो इस कारण अनिल कुंबले को कोच पद से हटाया गया?]

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उन्होंने कोच के अधिकार बढ़ाने की सिफारिश भी की। इस बारे में उन्होंने कहा, “मुझे हमेशा लगता है कि भारतीय टीम में कप्तान सबसे ताकतवार शख्स होता है। कोच कभी भी कप्तान जितना ताकतवर नहीं हो सकता। कोच केवल अपने सुझाव दे सकता है। कोच को और ज्यादा अधिकार देने की जरूरत है वर्ना चीजें वैसी ही बनी रहेंगी जैसी अभी हैं। हमारी टीम का प्रदर्शन इन दिनों काफी अच्छा है इसलिए हमें अपने रवैये में और व्यवहारिक होने की जरूरत है। कोच के पास चयनकर्ताओं से सीधे बात करने का अधिकार होना चाहिए और उसके सुझाव अमल में लाए जाने चाहिए।” मदन लाल ने 1996-97 में टीम इंडिया के कोच का पद संभाला था। इस दौरान उन्हें भी इसी तरह की स्थितियों का सामना करना पड़ा था।

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