add cricketcountry as a Preferred Source
Add Cricket Country as a Preferred Source add cricketcountry as a preferred source
×

MSK Pataudi: एक्सीडेंट में खोई एक आंख की रोशनी, फिर भी अपनी कप्तानी से भारतीय क्रिकेट को दिलाई नई पहचान

नवाब पटौदी- दुनिया उन्हें इसी नाम से जानती थी. बल्कि नवाब पटौदी जूनियर. मंसूर अली खान पटौदी ने भारतीय टीम को नई राह पर डालने का काम किया. उनके पिता इफ्तिखार अली खान पटौदी ने इंग्लैंड और भारत दोनों के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला.

user-circle cricketcountry.com Written by Bharat Malhotra
Last Updated on - January 5, 2026 5:40 PM IST

नई दिल्ली: मंसूर अली खान पटौदी की गिनती भारतीय क्रिकेट के महान कप्तानों में होती है. 5 जनवरी 1941 को भोपाल के शाही खानदान में जन्मे पटौदी ने महज 21 साल की उम्र में टीम इंडिया की कमान संभाली. उनकी आक्रामक सोच, फिटनेस पर जोर और नेतृत्व ने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाई. अपने पिता इफ्तिखार अली खान पटौदी के नक्शेकदम पर चलते हुए मंसूर अली खान ने न सिर्फ भारत की ओर से क्रिकेट खेला, बल्कि कप्तानी भी की.

1 जुलाई 1961 को इंग्लैंड के ईस्ट ससेक्स में कार एक्सीडेंट के दौरान पटौदी की दाहिनी आंख में कांच का टुकड़ा घुस गया, जिसके चलते उन्होंने एक आंख की रोशनी खो दी. हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और कुछ ही महीनों बाद भारतीय टीम के लिए डेब्यू किया.

Add Cricket Country as a Preferred Source add cricketcountry as a preferred source

‘टाइगर पटौदी’ के नाम से मशहूर दाएं हाथ के बल्लेबाज मंसूर अली खान पटौदी ने दिसंबर 1961 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेब्यू किया था. दूसरी टेस्ट पारी में ही पटौदी ने अर्धशतकीय पारी खेली. तीसरे मुकाबले में उन्होंने शतक भी जमा दिया.

अपने करियर के चौथे टेस्ट मैच में ही पटौदी बतौर कप्तान मैदान पर उतरे और भारतीय टीम में एक नई ऊर्जा भर दी. उनकी कप्तानी में भारत ने साल 1967 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपनी पहली विदेशी टेस्ट जीत हासिल की, जिसे भारत ने 3-1 से अपने नाम किया. इसी साल पटौदी को ‘विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर’ चुना गया. साल 1969 में पटौदी ने मशहूर बॉलीवुड एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर से शादी रचाई.

मंसूर अली खान एक साहसी और आक्रामक बल्लेबाज थे, जो शॉट खेलने से डरते नहीं थे. यही आक्रामक सोच उनकी कप्तानी में भी झलकती थी. साल 1962 से 1975 के बीच पटौदी ने बतौर कप्तान 40 मैच खेले, जिसमें 9 जीते. 1967-68 में पटौदी ने ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 75 रन की पारी खेली, जिसे आज भी फैंस याद रखते हैं. साल 1975 में पटौदी ने वेस्टइंडीज के भारत दौरे के बाद क्रिकेट से संन्यास ले लिया.

नवाब पटौदी के अंतरराष्ट्रीय करियर को देखें, तो उन्होंने 46 टेस्ट मुकाबलों में 34.91 की औसत के साथ 2,793 रन बनाए, जिसमें 6 शतक और 16 अर्धशतक शामिल हैं. इस दौरान उन्होंने इंग्लैंड के विरुद्ध फरवरी 1964 में 203 रन की नाबाद पारी भी खेली.

310 फर्स्ट क्लास मुकाबलों में पटौदी ने 33.67 की औसत के साथ 15,425 रन बनाए, जिसमें 33 शतक और 75 अर्धशतक शामिल रहे. 7 लिस्ट ए मुकाबलों में उन्होंने 210 रन बनाए.

संन्यास के बाद टाइगर पटौदी ने साल 1993 से 1996 तक मैच रेफरी की भूमिका निभाई. इस दौरान 2 टेस्ट और 10 वनडे में अंपायरिंग की. वह क्रिकेट मैगजीन ‘स्पोर्ट्सवर्ल्ड’ के एडिटर भी रहे. एक कमेंटेटर के रूप में भी नजर आए.

साल 2007 से सुनील गावस्कर और रवि शास्त्री के साथ आईपीएल गवर्निंग काउंसिल का भी हिस्सा रहे, लेकिन अक्टूबर 2010 में इस पद से इस्तीफा दे दिया.

1964 में पटौदी को ‘अर्जुन अवॉर्ड’ से नवाजा गया, जिसके बाद साल 1967 में ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया. उनके सम्मान में 2007 से भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज का नाम ‘पटौदी ट्रॉफी’ रखा गया था. अब उसका नाम बदलकर एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी कर दिया गया है. 22 सितंबर 2011 को 70 साल की उम्र में इंटरस्टीशियल लंग डिजीज से जूझते हुए पटौदी ने दुनिया को अलविदा कह दिया.