मार्नस लबशायन © Getty Images
मार्नस लबशायन © Getty Images

ब्रिसबेन में खेले जा रहे जेएलटी वनडे-कप के दूसरे मैच के दौरान ऐसी घटना हुई जो शायद क्रिकेट इतिहास में पहली बार हुई है। पहली बार किसी खिलाड़ी के मॉक फील्डिंग (चकमा देने वाली) करने के लिए उनकी टीम पर 5 रनों की जुर्माना लगाया गया। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया इलेवन और क्वींसलैंड के बीच खेले गए मैच के दौरान क्वीनलैंड के खिलाड़ी मार्नस लबशेयन ने हाथ से गेंद छूट जाने के बाद भी बल्लेबाज को डराने के लिए थ्रो फेंकने की एक्टिंग की। जिसके बाद मैरीलिबोन क्रिकेट क्लब के नए नियमों के हिसाब से विपक्षी टीम को पांच पेनल्टी रन दिए गए। मार्नस के साथी खिलाड़ी मैथ्यू रैनशॉ ने भी इस नियम का समर्थन किया है।

मैच के दौरान जब क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज परम उप्पल ने मिड ऑफ की तरफ शॉट लगाया तो मार्नस ने गेंद पकड़ने के लिए छलांग लगाई। हालांकि पूरी कोशिश के बाद भी गेंद उनके हाथ से निकल गई, जिसके बाद मार्नस ने बल्लेबाज को रन लेने से रोकने के लिए झूठा इशारा किया। पहले तो परम रन आउट के डर से रुक गए लेकिन जब उन्हें समझ आया कि मार्नस के पास गेंद नहीं है तो उन्होंने रन पूरा कर लिया। [ये भी पढ़ें: ट्विटर पर फैंस ने विराट के सिर फोड़ा हार का ठीकरा]

मार्नस को एमसीसी के नियम 41.5 के तहत दोषी पाया गया। इस नियम के मुताबिक, “किसी भी फील्डर द्वारा बोलकर या किसी तरह के एक्शन से खेलते समय बल्लेबाज का ध्यान भटकाना गलत है।” ये नए नियम एक अक्टूबर के बाद से खेले जाने वाले सभी मैचों पर लागू होंगे। क्वींसलैंड के सलामी बल्लेबाज मैथ्यू रैनशॉ ने भी इस नियम को सही बताया है। उनका कहना है कि, “ये बात साफ है, किसी को भी ऐसा नहीं करना चाहिए। बल्लेबाज के नजरिए से यह एक अच्छा नियम है। जब कोई दूर से गेंद फेंकता है तो ये बल्लेबाज के लिए ये जानना मुश्किल हो जाता है कि असल में फील्डर के पास गेंद है भी या नहीं।” [ये भी पढ़ें: बेंगलुरू वनडे में भारत की हार, लगातार 10 जीत का सपना टूटा]

रैनशॉ ने इस मैच में 67 रन बनाए थे, वहीं मैन ऑफ द मैच रहे मार्नस ने 61 रनों की पारी खेली थी। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के दिए 279 रनों का पीछा करते हुए क्वींसलैंड के टीम ने ये मैच 4 विकेट और 9 गेंद बाकी रहते ही जीत लिया।