Mess in BCCI’s structure of strength and conditioning department directly impacts players, says official
Virat Kohil, Kedar Jadhav © AFP

मौजूदा भारतीय क्रिकेट टीम में विश्व के कुछ बेहतरीन एथिलीट हैं। यो-यो टेस्ट और बोर्ड ने नए फिटनेस मानकों के चलते हर क्रिकेटर फिटनेस को लेकर सतर्क है। खुद कप्तान विराट कोहली भी फिटनेस को प्राथमिकता मानते हैं। हालांकि फिटनेस को लेकर इतनी चर्चा और प्रयास के बावजूद भारतीय क्रिकेटर लगातार चोटों से जूझ रहे हैं।

चोटिल भारतीय खिलाड़ियों की सूची में सबसे ताजा नाम केदार जाधव का है जिन्हें एशिया कप फाइनल मैच के दौरान दाएं पैर में हैमस्ट्रिंग इंजरी हो गई। गौरतलब है कि जाधव आईपीएल के दौरान पहले भी हैमस्ट्रिंग इंजरी से परेशान हो चुके हैं। केवल जाधव ही नहीं खबरों की मानें तो कप्तान विराट कोहली जो कि इस समय मैदान से दूर हैं, उन्हें भी कलाई में चोट लगी है। एशिया कप टूर्नामेंट के दौरान ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या को मैच के बीच में पीठ दर्द की शिकायत हुई थी। पांड्या के अलावा शार्दुल ठाकुर और अक्षर पटेल को भी चोट के चलते टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया था। वहीं टेस्ट विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा की मामूली इंजरी मेडिकल स्टाफ की लापरवाही के चलते इतनी गंभीर हो गई कि उन्हें सर्जरी करानी पड़ी।

साहा फिलहाल  एनसीए में रिकवरी से गुजर रहे हैं लेकिन सवाल ये है कि आखिर कड़े फिटनेस मानकों और आधुनिक उपकरणों के बावजूद भारतीय खिलाड़ी लगातार चोटों के शिकार क्यों हो रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर में बीसीसीआई के एक अधिकारी ने इसके लिए बोर्ड की खराब संरचना को जिम्मेदार ठहराया।

अधिकारी ने कहा, “बीसीसीआई के अंदर बहुत सारे सिस्टम खराब हैं लेकिन जो विभाग सीधा खिलाड़ियों को प्रभावित कर रहा है, वो बोर्ड का स्ट्रैंथ और कंडीशनिंग विभाग है। पैट्रिक (फारहार्ट, टीम इंडिया के फीजियो) और आशिष कौशिक (एनसीए के फीजियो) के बीच कोई संबंध नहीं है और एक तरीके से वो दो द्वीप हैं। कोषाध्यक्ष (अनिरुद्ध चौधरी) ने कुछ समय पहले इस मामले पर एक विस्तृत ईमेल लिखा था और हमे उम्मीद थी कि उसके बाद इस मामले में सुधार होगा लेकिन बाकी अहम चीजों की तरह ये मामला भी दबा दिया गया।”

उन्होंने आगे कहा, “जो चोटिल होते हैं वो कई चीजों के लेकर अनिश्चित होते हैं और कई बार अपने आईपीएल फीजियोथेरेपिस्ट से बात करने में ज्यादा सहज महसूस करते हैं। बासू (शंकर बासू, टीम इंडिया के ट्रेनर) की भूमिका भी जांच के घेरे में है, हालांकि उसे विराट कोहली का आदमी माना जाता है क्योंकि वही उसे टीम में लगाया था लेकिन कई खिलाड़ी दबी आवाज में अभ्यास के दौरान लगी चोटों की संख्या गिनाते हैं। कई खिलाड़ी उससे खुश नहीं हैं। इस गड़बड़ी को ठीक करने की जरूरत है लेकिन फिलहाल कोई भी इस मामले को हल करने के काबिल नहीं है क्योंकि मौजूदा हालात स्थिति दर स्थिति खराब होते जा रहे हैं।”