मुंबई के आजाद मैदान पर खेलते स्थानीय क्रिकेटर  © Getty Images
मुंबई के आजाद मैदान पर खेलते स्थानीय क्रिकेटर © Getty Images

मुंबई का मशहूर आजाद मैदान इन दिनों मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन की अनदेखी का खामियाजा भुगत रहा है। आजाद मैदान का आधे से ज्यादा हिस्सा इस समय मेट्रो रेल प्रोजेक्ट से प्रभावित हैं, वहीं अब दो हफ्ते बाद शुरू होने वाली रामलीला से मैदान को और नुकसान पहुंचेगा। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब इस मैदान पर रामलीला का आयोजन हो रहा है। दशहरा के करीब हर साल की इस मैदान पर रामलीला आयोजित की जाती है लेकिन इस साल मैदान की 22 में से 16 पिचें पहले से ही मेट्रो प्रोजेक्ट की भेंट चढ़ चुकी हैं। ऐसे में रामलीला शुरू होने के बाद नुकसान और बढ़ेगा।

109 साल पुराने विजय फोर्ट क्लब ने एमसीए का ध्यान इस तरह खींचने की कोशिश की है। फोर्ट के सेक्रेटरी जयंत झवेरी ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, “मुझे बताया गया है कि रामलीला शाम 7 से 10 बजे तक होगी। वो पिचों के पास स्टेज लगाएंगे, दशहरा के दौरान रामलीला देखने करीबन 2,000 लोग आते हैं। अगर रामलीला यहां होती है तो तीन क्लब प्रभावित होंगे। अधिकारियों ने हमसे कहा है कि वह रात में कुर्सियां हटवा देंगे लेकिन इस बात का भरोस कौन दिलाएगा कि पिचों को कोई नुकसान नहीं होगा।” उनका कहना है कि कोई भी पिचों की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। पिछले महीने आजाद मैदान पर मराठा-आरक्षण मोर्चा आयोजित किया गया था। इस दौरान मैदान और पिचों को काफी नुकसान हुआ था। [ये भी पढ़ें: वेस्टइंडीज को हराने के बाद जो रूट की निशाहें एशेज पर]

झवेरी ने कहा, “मोर्चा पिछले महीने हुआ था और इससे हमारी पिचें खराब हो गई थी और अब ये सब हो रहा है। क्रिकेटर भला कहां जाएं? मुंबई क्रिकेट के लिए मशहूर है। बांबे जिमखाना हमारे बगल में ही है, वहां क्रिकेट नहीं खेला जाता है। अधिकारी रामलीला और मोर्चे वहां आयोजित कर सकते हैं।” झवेरी के इस बयान पर एमसीए ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि ये बात साफ है कि युवा क्रिकेटरों को पनाह देने वाले इस मैदान को दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल किया जाना गलत है और इसे रोकने की जरूरत है।