भारतीय क्रिकेट टीम और ऑस्ट्रेलियाई टीम जब मैदान पर आमने-सामने होती हैं तो इनके बीच किस तरह की प्रतिद्ंदिता होती है ये जगजाहिर है. दोनों टीमों के बीच शाब्दिक जंग भी देखने को मिलती हैं. क्रिकेट फैंस को भारत का 2007-08 का वो ऑस्ट्रेलिया दौरा आज भी याद है जब ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह और कंगारू ऑलराउंडर एंड्रयू सायमंड्स के बीच तीखी नोंकझोंक देखने को मिली थी. लेकिन भारतीय टीम ने जब 2018 में ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था उस समय मेजबान टीम के खिलाड़ी बदले-बदले से नजर आए. क्रिकेट इतिहास में संभवत: ये पहला मौका होगा जब कंगारू खिलाड़ियों ने भारतीय टीम पर छींटाकशी को प्राथमिकता नहीं दी.

अपनी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया को 2015 में वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले माइकल क्लार्क का मानना है कि कंगारू खिलाड़ी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) कॉन्ट्रेक्ट गंवाने के डर से टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली और उनके साथी खिलाड़ियों पर स्लेजिंग करने से बचते हुए दिखे.

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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कुछ यादगार द्विपक्षीय मुकाबले हुए है लेकिन क्लार्क का मानना है कि जब भी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी भारत का सामना करते हैं तो उनकी निगाहें हर साल अप्रैल मई में होने वाले आईपीएल पर लगी रहती हैं.

क्लार्क ने ‘बिग स्पोर्ट्स ब्रेकफास्ट’ से कहा, ‘इस खेल में वित्तीय रूप में देखा जाए तो सभी जानते हैं कि भारत अंतरराष्ट्रीय या आईपीएल के कारण घरेलू स्तर पर कितना शक्तिशाली है.’

‘कंगारू टीम ने विपरीत रवैया अपनाया’google.com/search

बकौल क्लार्क, ‘मुझे लगता है कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट और संभवत: प्रत्येक टीम ने इस दौरान विपरीत रवैया अपनाया. वे कोहली या अन्य भारतीय खिलाड़ियों पर छींटाकशी करने से बहुत डरते थे क्योंकि उन्हें अप्रैल में उनके साथ खेलना था.’

…ताकि मैं छह सप्ताह में दस लाख डॉलर कमा पाऊं

क्लार्क को लगता है कि ऑस्ट्रेलिया के मैदान पर निर्ममतापूर्वक पेश आने के चरित्र के साथ समझौता किया गया क्योंकि आईपीएल नीलामी में शीर्ष दस ड्रॉ में आने के बाद उन्हें लगा कि वे कोहली पर कभी छींटाकशी नहीं कर सकते हैं.

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उन्होंने कहा, ‘दस खिलाड़ियों के नामों की सूची तैयार करो और वे इन आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को अपनी आईपीएल टीम में लेने के लिये बोली लगा रहे होते हैं. खिलाड़ियों का व्यवहार ऐसा था, ‘मैं कोहली पर छींटाकशी नहीं कर सकता, मैं चाहता हूं कि वह मुझे बेंगलोर टीम से चुने ताकि मैं छह सप्ताह में दस लाख डॉलर कमा पाऊं. मुझे ऐसा लगता है कि ऑस्ट्रेलिया कुछ समय के लिए ऐसे दौर से गुजरा जहां हमारी क्रिकेट थोड़ा नरम पड़ गई थी या फिर उतनी कड़ी नहीं थी जितना कि हम देखने के आदी हैं.’

क्लार्क ने यह बात उस समय के लिए की जब गेंद से छेड़छाड़ के मामले के बाद टीम के साथ संभ्रांत और ईमानदार जैसे शब्द जोड़े गए थे. भारत ने 2018 में ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सीरीज अपने नाम की थी. विराट कोहली की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने टेस्ट सीरीज पर 2-1 से कब्जा किया था.