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लैंगर विवाद पर बोले माइकल क्लार्क- अगर खिलाड़ियों को परेशानी है तो कोच की पीठ के पीछे बात कर नहीं निकलेगा हल
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक कुछ कंगारू खिलाड़ी कोच जस्टिन लैंगर की मैनेजमेंट शैली से खुश नहीं हैं।
Written by India.com Staff
Last Published on - February 1, 2021 1:29 PM IST

भारत के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में मिली शर्मनाक हार के बाद ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के कोच जस्टिन लैंगर (Justin Langer) की शैली के खिलाफ आवाज उठाने की खबरें मीडिया में आने लगी हैं। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक कई खिलाड़ी लैंगर की मैनेजमेंट शैली और काम करने की तरीके से नाखुश हैं। हालांकि कोच ने इन खबरों को पूरी तरह से गलत बताया है।
अब ऑस्ट्रेलियाई टीम के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क (Micahel Clarke) ने इस मामले में पर अपनी राय दी है। विश्व कप विजेता कप्तान का कहना है कि अगर खिलाड़ियों को कोच से कोई परेशानी है तो बातचीत के जरिए उसका हल निकाला जाना चाहिए, ड्रेसिंग रूम की बात मीडिया में फैलने से केवल विवाद बढ़ेगा।
फॉक्स क्रिकेट ने क्लार्क के हवाले से लिखा, “मैं उम्मीद करता हूं ये सच ना हो, उम्मीद करता हूं कि ये केवल मीडिया की बनाई हेडलाइन है और कोई खिलाड़ियों लैंगर की पीठे के पीछे ना गया हो। मुझे लगता है कि ये कमजोर कदम है कि आप खबर के पीछे खिलाड़ी का नाम नहीं लिख रहे हैं। मैं उम्मीद करता हूं लैंगर उस खिलाड़ी को पहचाने और फिर उससे आमने सामने बात करे।”
क्लार्क ने एक खिलाड़ी के कोच की पीठ के पीछे मीडिया से बात करने को कमजोर कदम बताया। उन्होंने कहा, “अगर किसी खिलाड़ी को ऐसा लगता है, तो भी ये सही तरीका नहीं है, इससे केवल विवाद खड़ा होगा। जाओ और लैंगर से बात करें और सीनियर खिलाड़ियों से बात करो। कई बात ऐसा होता है वो अहम नहीं होता कि आप क्या कह रहे हैं बल्कि आप किस तरह से कहते हैं।”
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उन्होंने कहा, “मुझे अब भी लगता है कि आप बिना विवाद खड़ा किए और ये कहे बिना कि आपको चुना नहीं जा रहा है… बातचीत का रास्ता ढूंढ सकते हैं। लैंगर मजबूत चरित्र वाला शख्स है। वो ये चाहेगा कि ये खिलाड़ी जानें कि अगर आपको क्रिकेट के सबसे ऊंचे स्तर पर सफल होना है तो आपको खुद को चुनौती देनी होगी और बेहतर बनना होगा।”
पूर्व कप्तान ने कहा, “इससे होता ये है कि लोग उसे पसंद नहीं करते हैं कि क्योंकि वो मुख्य कोच और बतौर खिलाड़ी बेहद अनुशासित है, उन कुछ खिलाड़ियों के लिए जो कि घंटो ट्रेनिंग नहीं करना चाहते हैं या फिर वो लोग जो टीम मीटिंग में नहीं आना चाहते हैं और हर खिलाड़ी से बातचीत नहीं करना चाहते हैं। इस बात में कोई शक नहीं है कि कोई भी परफेक्ट नहीं हो सकता है लेकिन ये उसकी शैली है।”
